UGC NET दिसंबर 2025 रिवाइज्ड फाइनल आंसर-की जारी, 5 विषयों के नतीजे जल्द

0
6

नई दिल्ली। UGC NET: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) दिसंबर 2025 सत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रिवाइज्ड फाइनल आंसर-की जारी कर दी है। यह बदलाव दिल्ली हाई कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद किया गया है। कोर्ट के इस आदेश से उन हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से उत्तरों में गड़बड़ी को लेकर संघर्ष कर रहे थे।

यह रिवाइज्ड फाइनल आंसर-की सभी विषयों के लिए नहीं, बल्कि मुख्य रूप से इतिहास, अर्थशास्त्र, शिक्षा, कॉमर्स और हिंदी के लिए जारी की गई है। इन पांचों विषयों के रिवाइज्ड रिजल्ट अब किसी भी वक्त आधिकारिक वेबसाइट पर घोषित किए जा सकते हैं।

पूरे विवाद की शुरूआत ‘इतिहास’ विषय के पेपर से हुई थी, जिसे लेकर छात्रों में भारी आक्रोश देखा गया था। दिसंबर सेशन में इतिहास की परीक्षा में लगभग 60,777 उम्मीदवार शामिल हुए थे, जिनके परिणाम 4 फरवरी को घोषित किए गए थे। रिजल्ट आने के बाद छात्रों ने आरोप लगाया था कि कम से कम 9 सवालों के उत्तर गलत मार्क किए गए हैं।

हैरानी की बात यह थी कि छात्रों द्वारा पुख्ता सबूतों के साथ आपत्तियां दर्ज कराने के बावजूद, 4 फरवरी को जारी फाइनल आंसर-की में कोई बदलाव नहीं किया गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और मामला अंत में अदालत तक पहुंच गया। अब रिवाइज्ड फाइनल आंसर-की में NTA ने इतिहास विषय के 4 सवालों को हटा दिया है, जबकि 3 सवालों के दो सही उत्तर माने गए हैं।

UGC NET Dec 2025 Answer Key direct link

कॉमर्स और अन्य विषयों में भी बदलाव
कॉमर्स विषय, जिसकी परीक्षा 3 जनवरी को पहली पाली में आयोजित की गई थी, उसमें भी बड़े सुधार किए गए हैं। रिवाइज्ड फाइनल आंसर-की के अनुसार कॉमर्स विषय में 3 सवालों को हटा दिया गया है। 1 सवाल ऐसा है जिसके अब दो सही उत्तर स्वीकार किए गए हैं।

सवालों को ‘ड्रॉप’ किए जाने का मतलब यह है कि उन सवालों के अंक उन सभी अभ्यर्थियों को मिलेंगे जिन्होंने उस शिफ्ट में परीक्षा दी थी। इससे मेरिट लिस्ट और कट-ऑफ में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

हाई कोर्ट का हस्तक्षेप और छात्रों की जीत
छात्रों का आरोप था कि NTA और उसके एक्सपर्ट के पैनल ने गंभीर गलतियों को नजरअंदाज किया, जिससे कई योग्य उम्मीदवार जेआरएफ (JRF) और असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता से वंचित रह गए थे। दिल्ली हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एजेंसी को अपनी गलती सुधारनी पड़ी। यह फैसला पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ी जीत माना जा रहा है।