Soybean Price: क्रशिंग-प्रोसेसिंग यूनिट्स की मांग निकलने से सोयाबीन का भाव तेज

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नई दिल्ली। विदेशों से सोया तेल का आयात कम होने से भारतीय रिफाइनर्स स्वदेशी तेल की खरीद में अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं जिससे क्रशिंग-प्रोसेसिंग इकाइयों को किसानों एवं व्यापारियों से सोयाबीन की खरीद का अच्छा प्रोत्साहन मिल रहा है।

इसके फलस्वरूप 27 दिसम्बर-2 जनवरी वाले सप्ताह के दौरान इस महत्वपूर्ण तिलहन के प्लांट डिलीवरी मूल्य में मध्य प्रदेश में 90 रुपए तथा महाराष्ट्र एवं राजस्थान में 150 रुपए प्रति क्विंटल तक की तेजी दर्ज की गई।

प्लांट डिलीवरी भाव: समीक्षाधीन संगठनों के दौरान सोयाबीन का प्लांट डिलीवरी मूल्य ऊंचे में मध्य प्रदेश में 4900 रुपए प्रति क्विंटल, महाराष्ट्र में 5120 रुपए प्रति किंटल तथा राजस्थान में 5325 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा। इस तरह प्लांट डिलीवरी भाव सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य 5328 रुपए प्रति क्विंटल के काफी निकट पहुंच गया है जो पहले बहुत पीछे चल रहा था।

महाराष्ट्र एवं राजस्थान में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सोयाबीन की सरकारी खरीद हो रही है जबकि मध्य प्रदेश में भावान्तर भुगतान योजना लागू है। लेकिन सोयाबीन का भाव सुधरने के बावजूद सोया रिफाइंड तेल की कीमतों में 1-2 रुपए प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई।

मध्य प्रदेश में गिरावट कम रही मगर महाराष्ट्र में ज्यादा देखी गई। कोटा में भाव 5 रुपए फिसलकर 1280 रुपए प्रति 10 किलो तथा मुम्बई में 10 रुपए गिरकर 1260 रुपए प्रति 10 किलो पर आ गया। कांडला और हल्दिया में भाव पिछले स्तर पर ही स्थिर रहा। वैश्विक बाजार में भी थोड़ी नरमी देखी गई।

राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख मंडियों में सोयाबीन की सीमित आवक हो रही है। समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान इसकी दैनिक आवक 29 दिसम्बर को 2.85 लाख बोरी, 30 दिसम्बर को 2 लाख बोरी, 31 दिसम्बर को 1.70 लाख बोरी और 2 जनवरी को 2.40 लाख बोरी दर्ज की गई। मालूम हो कि सोयाबीन की प्रत्येक बोरी 100 किलो या 1 किंटल की होती है।

सोया खल (डीओसी):सोया डीओसी में अच्छा कारोबार हुआ और घरेलू तथा निर्यात मांग बेहतर रहने से कीमत में सुधार देखा गया। आमतौर पर कीमत 500-1000 रुपए प्रति टन तेज रही मगर राजस्थान की एक इकाई में यह 4500 रुपए उछलकर 36,000 रुपए प्रति टन पर पहुंच गई।