कोच्चि। Small Cardamom: उत्तरी अमरीका महाद्वीप के मध्यवर्ती देश- ग्वाटेमाला में प्राकृतिक आपदाओं से फसल को हुए नुकसान के कारण उत्पादन घटने की संभावना को देखते हुए वैश्विक बाजार में छोटी (हरी) इलायची की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल देखी जा रही है।
भारत को इसका सीधा लाभ प्राप्त होने की उम्मीद है। भारत से इलायची के निर्यात में जोरदार वृद्धि देखी जा रही है। चालू मार्केटिंग सीजन के दौरान देश से इसका कुल शिपमेंट उछलकर 14,000 टन के आसपास पहुंच जाने के आसार हैं जो ऐतिहासिक औसत स्तर से करीब दो गुणा है।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार ग्वाटेमाला में इलायची का उत्पादन 50 प्रतिशत तक घट जाने की संभावना है। इससे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति में जो अंतर (गैप) आएगा उसे भरने के लिए भारतीय इलायची उपलब्ध रहेगी।
कोई अन्य बेहतर विकल्प मौजूद नहीं होने के कारण विदेशी आयातकों को भारत से विशाल मात्रा में इलायची खरीदने के लिए विवश होना पड़ेगा। इस बीच पश्चिम एशिया एवं खाड़ी क्षेत्र के मुस्लिम बहुल देशों में इलायची में रमजान की मांग भी बढ़ गई है।
हाल ही में समाप्त हुए गल्फ गुड एक्सपो में भारतीय निर्यातकों को इलायची की स्पॉट बुकिंग करने में काफी अच्छी सफलता मिल गई। ईरान में नौरोज सीजन के लिए छोटी इलायची की भारी मांग रही और भारत को इस अवसर का फायदा उठाते हुए उसके बाजार में अपनी भागीदारी बढ़ाने में अच्छी कामयाबी मिल गई। इसके अलावा मध्य-पूर्व के देशों-सऊदी अरब, कुवैत तथा संयुक्त अरब अमीरात आदि ने भी रमजान से पूर्व इलायची के आयात का अनुबंध किया। ये देश भारतीय इलायची के प्रमुख खरीदार हैं।
हालांकि लाल सागर क्षेत्र से मिलिंग में कुछ समस्या आ रही है लेकिन मध्य-पूर्व एशिया तक कोई खास संकट नहीं है। उससे आगे यूरोप की तरफ जाने वाले जहाजों पर ही खतरा है। इस बीच अमरीका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटा दिया है इसलिए वहां भारतीय इलायची के निर्यात में अच्छी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। यूरोप में निर्यात आंशिक रूप से प्रभावित हो सकता है।

