Rice Export: भारत की वापसी से पाकिस्तान का चावल एक्सपोर्ट 40 फीसदी गिर गया

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इस्लामाबाद। ग्लोबल मार्केट में भारत के वापसी ने पाकिस्तान के चावल निर्यात की कमर तोड़ दी है। पाकिस्तान को मौजूदा वित्तीय वर्ष के पहले छह महीने बड़ा घाटा उटाना पड़ा है, क्योंकि उसका निर्यात 40.5 प्रतिशत गिरकर 1.31 अरब डॉलर रह गया है।

मंगलवार को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की स्टैंडिंग कमेटी ऑन कॉमर्स के डेटा से यह जानकारी सामने आई है। इसकी वजह वैश्विक बाजार में भारत की वापसी है, जिससे इस्लामाबाद का मार्केट शेयर और प्राइसिंग पावर कम हो गया। नॉन-बासमती चावल में पाकिस्तान का नुकसान तो और भी बड़ा है।

पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, नॉन-बासमती चावल का निर्यात घटकर 82.78 करोड़ डॉलर रह गया, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 50.8 प्रतिशत की गिरावट है। वहीं, इसका वॉल्यूम एक साल पहले के 31.5 लाख टन से घटकर 20 लाख टन रह गया।

हालांकि, पाकिस्तान के बासमती चावल के निर्यात में अपेक्षाकृत कम कमी आई है। बासमती एक्सपोर्ट 6.62 प्रतिशत गिराकर 47.77 करोड़ डॉलर रह गया। वहीं, इसका वॉल्यूम 487,278 टन से घटकर 436,484 रह गया।

पाकिस्तान को इस झटके के पीछे भारत है और इसे पाकिस्तानी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मंत्रालय ने स्वीकार किया है। मंत्रालय ने दिसम्बर और जनवरी में दो अलग-अलग बैठक में संसदीय कमेटी को इस बारे में जानकारी दी है। इसमें बताया गया कि ग्लोबल मार्केट में भारत की दोबारा एंट्री इसकी एक बड़ी वजह थी। भारत की बढ़ती सप्लाई ने पाकिस्तानी चावल को बाजार में कमजोर कर दिया है।

भारत के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का असर
पाकिस्तानी अधिकारियों ने सांसदों को भारत की मजबूती की वजह कई देशों और संगठनों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को बताया। भारत को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से फायदा होता है। भारत ने दुनिया भर के देशों और समूहों के साथ ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाई है। इसके सामने पाकिस्तानी निर्यातकों का टिकना मुश्किल हो जाता है। हालत यह है पाकिस्तान के एक्सपोर्टर अब खुद को बचाए रखने के लिए मार्केट को डाइवर्सिफाइ करने पर विचार कर रहा है।