Rabi Crop: नए माल की आवक से चना-उड़द के भाव में नरमी के आसार

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मुम्बई। विदेशों से नियमित आयात जारी रहने और रबी कालीन फसल की नई आवक शुरू होने से घरेलू प्रभाग में चना एवं उड़द सहित अन्य दलहनों की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ने की संभावना है। दूसरी ओर इसकी मांग कमजोर देखी जा रही है जिससे आगामी समय में कीमतों पर कुछ और दबाव पड़ सकता है।

जहां तक अरहर (तुवर) की बात है तो इसकी कीमतों में थोड़ा-बहुत उतार-चढ़ाव आने की संभावना है लेकिन कुल मिलाकर धारणा नरमी की ही बनी हुई है। मसूर एवं मटर का नया माल भी जल्दी ही आने वाला है।

एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- इंडिया पल्सेस एन्ड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) की साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार अच्छी आवक एवं दाल मिलों की सीमित मांग के कारण चना तथा उड़द के दाम पर दबाव बना हुआ है। तुवर के भाव पर भी कुछ दबाव पड़ सकता है लेकिन आयात महंगा होने से इसके मूल्य में जोरदार गिरावट आना मुश्किल लगता है। वैसे इन तीनों दलहनों का नियमित रूप से आयात हो रहा है।

एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र एवं गुजरात की मंडियों में नए चने की आपूर्ति शुरू हो चुकी है। पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान चना का घरेलू उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है क्योंकि एक तो इसके बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी हुई है और दूसरे, कुछ राज्यों में अनुकूल मौसम के कारण इसकी औसत उपज दर में भी इजाफा होने की उम्मीद है।

महाराष्ट्र में फरवरी के अंतिम सप्ताह से चना के नए माल की आवक जोर पकड़ने की संभावना है जबकि होली के बाद राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश में भी नया चना आने लगेगा। मार्च के प्रथम सप्ताह के अनेक मंडियों में नए चने की आवक शुरू हो जाएगी।

चना दाल एवं बेसन की मांग कमजोर बनी हुई है और इसलिए दाल मिलर्स केवल अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने लायक मात्रा में ही चना की खरीद कर रहे है।