नई दिल्ली। NEW START: अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों के नियंत्रण के लिए की गई अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण न्यू START (New Strategic Arms Reduction Treaty) संधि थी, जो 5 फरवरी 2026 को आधिकारिक रूप से समाप्त हो गई। दुनिया की इस आखिरी परमाणु हथियार नियंत्रण संधि के समाप्त होते ही वैश्विक सुरक्षा को लेकर चिंताएँ और गहरा गई हैं।
इसी बीच, अमेरिका और चीन आपस में उलझ गए हैं। अमेरिका ने चीन पर गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी तरफ, चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें “बेबुनियाद और झूठा प्रचार” बताया है।
दो महाशक्तियों के बीच यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और रूस जिनके पास दुनिया के सबसे ज़्यादा परमाणु हथियार हैं, ने माना है कि हथियार नियंत्रण पर नई बातचीत जल्द शुरू करना जरूरी है।
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र समर्थित निरस्त्रीकरण सम्मेलन (Conference on Disarmament) में बोलते हुए, शीर्ष अमेरिकी हथियार नियंत्रण अधिकारी थॉमस डिनानो ने कहा कि चीन ने गुप्त परमाणु परीक्षण किए हैं और उन्हें छिपाने की कोशिश की है।
समाचार एजेंसी AP के अनुसार, उन्होंने कहा, “अमेरिकी सरकार को पता है कि चीन ने परमाणु विस्फोटक परीक्षण किए हैं, जिसमें सैकड़ों टन की निर्धारित क्षमता वाले परीक्षणों की तैयारी भी शामिल है।” अमेरिका का कहना है कि चीन की परमाणु नीति में “कोई सीमा नहीं, कोई पारदर्शिता नहीं, कोई निगरानी नहीं” है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
दूसरी तरफ, चीन ने अमेरिका के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। चीन के राजदूत शेन जियान ने कहा कि बीजिंग अब भी परमाणु परीक्षण पर स्वैच्छिक रोक का पालन कर रहा है। उन्होंने अमेरिका पर पलटवार करते हुए कहा कि ये आरोप “परमाणु निरस्त्रीकरण से ध्यान हटाने और अमेरिका की परमाणु प्रभुता को सही ठहराने की कोशिश” हैं। चीन का तर्क है कि उसका परमाणु भंडार अमेरिका और रूस की तुलना में अब भी काफी छोटा है और असली जिम्मेदारी इन्हीं दो देशों की बनती है।
हथियारों पर कोई कानूनी रोक नहीं
न्यू स्टार्ट संधि के खत्म होने के साथ ही पहली बार पिछले पचास वर्षों में ऐसा हुआ है कि अमेरिका और रूस के परमाणु हथियारों पर कोई कानूनी सीमा नहीं बची है। यह संधि दोनों देशों को अधिकतम 1,550 तैनात परमाणु हथियारों तक सीमित करती थी। इसके समाप्त होने के बाद अमेरिका और रूस के वार्ताकारों ने अबू धाबी में मुलाकात कर जल्द बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक साल के लिए संधि की शर्तें बनाए रखने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे स्वीकार नहीं किया। ट्रंप का कहना है कि कोई भी नया समझौता चीन को शामिल किए बिना अधूरा होगा।
अमेरिका का दबाव
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि चीन को शामिल किए बिना कोई भी समझौता अमेरिका और उसके सहयोगियों को “कम सुरक्षित” बनाएगा। अमेरिका का दावा है कि चीन का परमाणु भंडार 2020 में लगभग 200 था, जो अब बढ़कर 600 से अधिक हो गया है और 2030 तक 1,000 से ज़्यादा हो सकता है। वहीं, चीन ने इस पर साफ इनकार करते हुए कहा कि वह फिलहाल किसी त्रिपक्षीय समझौते में शामिल नहीं होगा।
किस देश के पास ज्यादा परमाणु हथियार
बता दें कि अमेरिका और रूस के पास मिलकर दुनिया के 80% से ज़्यादा परमाणु हथियार हैं, जबकि चीन का भंडार सबसे तेजी से बढ़ रहा है। न्यू स्टार्ट संधि के खत्म होने से दुनिया इस समय एक खतरनाक परमाणु शून्य में प्रवेश कर चुकी है, जहां अमेरिका तीन देशों का समझौता चाहता है, रूस और देशों को जोड़ने की बात करता है वहीं चीन बातचीत से दूरी बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द कोई नया समझौता नहीं हुआ, तो दुनिया शीत युद्ध के बाद के सबसे अस्थिर परमाणु दौर में प्रवेश कर सकती है।

