Nani bai ko mayro: सच्चे मन से की गई भक्ति और श्रद्धा कभी व्यर्थ नहीं जाते

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nani bai ko mayro katha

कोटा। nani bai ko mayro: कालपुरा, नयापुरा स्थित राममंदिर महोत्सव समिति द्वारा आयोजित नानी बाई का मायरा की कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। कथा व्यास अन्तिमा योगी ने इस पावन अवसर पर भक्तों को प्रेरणादायक प्रसंग सुनाए।

उन्होंने बताया कि नानी बाई का मायरा हमारे धर्म और संस्कृति की अद्भुत परंपरा का प्रतीक है, जो समर्पण और श्रद्धा का संदेश देती है। कथा के दौरान उन्होंने भक्ति, सेवा और त्याग का महत्व समझाया और भगवान श्रीकृष्ण के अद्वितीय प्रेम और करुणा की व्याख्या की। इस अवसर पर भजनों और मंगल गीतों ने भक्तिमय वातावरण को और भी पवित्र बना दिया।

अन्तिमा योगी ने कहा ​कि नरसी मेहता जी एक महान भक्त और संत थे। उन्होंने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उनका प्रभु के प्रति विश्वास कभी नहीं डगमगाया। उनकी भक्ति और विश्वास हमें सिखाते हैं कि चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएं, हमें अपने ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।

नरसी मेहता का जीवन एक प्रेरणा है कि सच्ची भक्ति और विश्वास से हम किसी भी कठिनाई को पार कर सकते हैं। अगर भक्त की भक्ति में शक्ति होती हैं तो प्रभु स्वयं आते हैं। यह कथा हमें भक्ति की शक्ति का संदेश देती है।

हम सभी के भीतर भी यह शक्ति विद्यमान है। जरूरत है तो प्रभु के प्रति अपने विश्वास प्रबल करने की। नरसी मेहता का जीवन और उनकी भक्ति हमें सिखाती है कि सच्चे मन से की गई भक्ति और श्रद्धा कभी व्यर्थ नहीं जाते।