नई दिल्ली। दोनों शीर्ष उत्पादक प्रांतों- राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश की कुछ मंडियों में सरसों के नए माल की थोड़ी बहुत आवक शुरू हो गई है जबकि आगामी दिनों में इसकी आपूर्ति की रफ्तार तेज होने की संभावना है।
बिजाई क्षेत्र में करीब 2.80 लाख हेक्टेयर की वृद्धि एवं मौसम की अनुकूल स्थिति के कारण इस बार सरसों का उत्पादन बेहतर होने के आसार हैं लेकिन कीमतों में बदलाव इसकी मांग एवं सरकारी खरीद पर निर्भर करेगा। 31 जनवरी- 6 फरवरी वाले सप्ताह के दौरान आमतौर पर सरसों के थोक मंडी भाव में 100-150 रुपए प्रति क्विंटल की नरमी देखी गई।
42 प्रतिशत कंडीशन वाली सरसों का दाम दिल्ली में 150 रुपए घटकर 7000 रुपए प्रति क्विंटल तथा जयपुर में 50 रुपए गिरकर 7350 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। हालांकि गुजरात की मंडियां कुछ तेज रही क्योंकि वहां नीचे मूल्य पर इसकी अच्छी लिवाली हुई लेकिन हरियाणा एवं मध्य प्रदेश की मंडियों में कीमत 150 रुपए प्रति क्विंटल तक घट गई।
राजस्थान में मिश्रित रुख देखा गया। नए माल की छिटपुट आपूर्ति के बावजूद राज्य में सरसों का दाम सरकारी समर्थन मूल्य से ऊंचा चल रहा है जिससे किसानों को राहत मिल रही है। फसल की हालत अच्छी बताई जा रही है। सरसों का भाव उत्तर प्रदेश के हापुड़ में 100 रुपए तथा आगरा में 250 रुपए प्रति क्विंटल नरम रहा।
सरसों में नरमी से सरसों तेल- एक्सपेलर एवं कच्ची घानी की कीमतों में भी 1-2 रुपए प्रति किलो की गिरावट आई। दिल्ली में एक्सपेलर का भाव 20 रुपए घटकर 1455 रुपए प्रति 10 किलो तथा चरखी दादरी में 1465 रुपए प्रति 10 किलो। कोटा में कच्ची घानी सरसों तेल का दाम 65 रुपए घटकर 1455 रुपए प्रति 10 किलो पर आ गया।
प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में सरसों की आवक कम हो रही है क्योंकि नए माल की जोरदार आवक शुरू होने से पूर्व इसकी आपूर्ति का ऑफ सीजन रहता है। वैसे लग्नसरा का सीजन होने से कीमतों में ज्यादा नरमी आना मुश्किल लगता है।
सरकारी एजेंसियों के पास सरसों का सीमित स्टॉक बचा हुआ है लेकिन तेल मिलों को समुचित मात्रा में कच्चा माल प्राप्त हो रहा है। सरसों खल तथा डीओसी में कारोबार सामान्य से कम होने के कारण भाव लगभग स्थिर या कुछ नरम रहा।

