Mustard: ऊंचे भावों पर लिवाली कमजोर पड़ने से सरसों की कीमतों में गिरावट

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नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में माल की सीमित आवक होने के बावजूद क्रशिंग-प्रोसेसिंग इकाइयों एवं प्राइवेट व्यापारिक फर्मों की कमजोर मांग के कारण 6-12 दिसम्बर वाले सप्ताह के दौरान सरसों की कीमतों में 100-150 रुपए प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई।

42 प्रतिशत कंडीशन वाली सरसों का दाम दिल्ली में 150 रुपए घटकर 6950 रुपए प्रति क्विंटल तथा जयपुर में 100 रुपए गिरकर 7200 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया।

इसी तरह सामान्य औसत क्वालिटी वाली सरसों की कीमत गुजरात में 45-50 रुपए तथा मध्य प्रदेश में 50-100 रुपए प्रति क्विटल नीचे आई जबकि हरियाणा के चरखी दादरी में भाव 150 रुपए की गिरावट के साथ 7000 रुपए प्रति क्विटल रह गया।

उत्तर प्रदेश की हापुड़ मंडी में स्थिरता रही मगर आगरा मंडी में 50 रुपए की नरमी आई। सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त-राजस्थान की अधिकांश मंडियों में दाम नरम रहा। नेवाई एवं नागौर में 130 रुपए की नरमी रही। इसी तरह गंगानगर, भरतपुर एवं अलवर में 20 से 50 रुपए की सुस्ती रही नगर कोटा में 50 रुपए की तेजी दर्ज की गई। बूंदी में भाव 50 रुपए गिरकर 7050 रुपए प्रति क्विटल रह गया।

सरसों के दाम में गिरावट आने से सरसों तेल एक्सपेलर एवं कच्ची घानी- दोनों की कीमतों में 2-3 रुपए प्रति किलो की नरमी देखी गई। दिल्ली में एक्सपेलर का भाव 25 रुपए गिरकर 1420 रुपए प्रति 10 किलो तथा लुधियाना में 1435 रुपए प्रति 10 किलो रह गया। मुरैना, गंगानगर भरतपुर, अलवर एवं कोटा में कच्ची घानी सरसों तेल का दाम 30-40 रुपए प्रति 10 किलो घट गया। आगरा में इसके 20 रुपए की गिरावट रही।

सरसों खल एवं डीओसी में मांग कमजोर रही और इसलिए कीमतों में नरमी आ गई। सरसों डीओसी के दाम में 500 से 800 रुपए प्रति क्विटल तक की गिरावट देखी गई। चीन के आयातक काफी हद तक निष्क्रिय रहे और घरेलू मांग भी कमजोर रही।

सरसों की बिजाई अभी जारी है और इसका क्षेत्रफल गत वर्ष से आगे चल रहा है। आगामी उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद से मंडियों में सरसों के पिछले स्टॉक की आवक बढ़ने की संभावना है। सरकारी स्टॉक से भी सरसों की नियमित बिक्री हो रही है। फरवरी से नई सरसों की आवक शुरू हो जाती है इसलिए किसान जनवरी में बिक्री बढ़ा सकते हैं।