Moody’s ने भारत की GDP ग्रोथ घटाई, 6% पर पहुंचा अनुमान; महंगाई बढ़ने की चेतावनी

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नई दिल्ली। रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया है। पहले यह अनुमान 6.8 प्रतिशत था। एजेंसी का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, जिससे विकास की रफ्तार धीमी हो सकती है और महंगाई बढ़ने का खतरा है।

मूडीज की रिपोर्ट के अनुसार, अगर यह तनाव लंबा खिंचता है तो खासतौर पर एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इससे घरों में गैस की कमी, ईंधन और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी पड़ेगा, क्योंकि भारत उर्वरकों के लिए आयात पर काफी निर्भर है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपनी जरूरत का करीब 55 प्रतिशत कच्चा तेल और 90 प्रतिशत से ज्यादा एलपीजी पश्चिम एशिया से आयात करता है। ऐसे में वहां की स्थिति का सीधा असर देश पर पड़ता है।

मूडीज ने यह भी कहा कि फिलहाल महंगाई काबू में है, लेकिन वैश्विक हालात के कारण इसमें बढ़ोतरी का जोखिम बढ़ गया है। एजेंसी ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2027 में औसत महंगाई दर 4.8 प्रतिशत रह सकती है, जो 2026 में 2.4 प्रतिशत थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर महंगाई बढ़ती है और अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहती है तो आने वाले समय में ब्याज दरों को स्थिर रखा जा सकता है या जरूरत पड़ने पर धीरे-धीरे बढ़ाया भी जा सकता है। यह फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि वैश्विक तनाव कितने समय तक बना रहता है और उसका असर ईंधन व खाद्य कीमतों पर कितना पड़ता है।

मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता दिख रहा है। अलग अलग रिपोर्ट्स में अनुमान लगाया गया है कि आने वाले समय में देश की आर्थिक वृद्धि दर कुछ धीमी हो सकती है।

Moody’s की 31 मार्च की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत से घटकर करीब 6 प्रतिशत रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई और बढ़ती लागत के कारण निजी खपत कमजोर हो सकती है। इसके साथ ही औद्योगिक गतिविधियों में नरमी और निवेश की रफ्तार में भी कमी देखने को मिल सकती है।

वहीं, Organisation for Economic Co-operation and Development ने भी अपने आकलन में कहा है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत से घटकर 6.1 प्रतिशत तक आ सकती है।

EY की इकोनॉमी वॉच रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर पश्चिम एशिया का तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वृद्धि दर में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। साथ ही खुदरा महंगाई दर में करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।