Jeera Price: नई फसल की जोरदार आवक होने से जीरा के दाम पर दबाव

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राजकोट। देश के पश्चिमी प्रान्त- गुजरात में जीरा की नई फसल की कटाई-तैयारी जोरदार ढंग से होने लगी है और मंडियों में इसकी आवक तेजी से बढ़ रही है।

सबसे प्रमुख उत्पादक मंडी (व्यापारिक केन्द्र) ऊंझा में जीरा की औसत दैनिक आवक बढ़ते हुए अब 50-55 हजार बोरी पर पहुंच गई जबकि इसके अनुरूप घरेलू एवं निर्यात मांग नहीं होने से कीमतों पर दबाव पड़ने लगा है।

मौजूदा समय में भी इस मंडी में 40-45 हजार बोरी जीरा की दैनिक आवक होने की सूचना मिल रही है। इसी तरह राजस्थान में भी नए जीरे की आवक होने लगी है मगर वहां इसकी मात्रा महज 5 हजार बोरी के करीब बताई जा रही है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2024-25 सीजन के दौरान गुजरात में जीरे का उत्पादन क्षेत्र घटकर 4,76,500 हेक्टेयर पर सिमट गया जो 3,81,424 हेक्टेयर से करीब 25 प्रतिशत अधिक है।

पिछले सप्ताह गुजरात की मंडियों में जीरा के दाम में 40 से 150 रुपए प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई। उम्मीद दी जा रही है कि नीचे मूल्य पर लिवाली बढ़ने के बाद बाजार कुछ सुधर सकता है लेकिन उससे पूर्व खरीदार कीमतों में स्थिरता का इंतजार कर सकते हैं।

वैश्विक बाजार में भारत फिलहाल जीरे का एक मात्र प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश बना हुआ है। तुर्की, सीरिया एवं ईरान जैसे देशों में जून-जुलाई के दौरान नए जीरे की आवक शुरू होती है। सीरिया की अंदरूनी हालत बहुत खराब है जबकि तुर्की का अधिकांश स्टॉक पहले ही बिक चुका है।

मसाला बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष (2024-25) के शुरूआती 8 महीनों में यानी अप्रैल-नवम्बर 2024 के दौरान देश से जीरा का निर्यात बढ़कर 1.59 लाख टन से ऊपर पहुंच गया जो वर्ष 2025 के इन्हीं महीनों के शिपमेंट लगभग 94 हजार टन से काफी अधिक रहा।

समीक्षाधीन अवधि में जीरा की निर्यात आय भी 348 करोड़ रुपए से उछलकर 4382 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। उम्मीद की जा रही है कि चालू वित्त वर्ष की सम्पूर्ण अवधि के दौरान जीरा की कुल निर्यात मात्रा 2 लाख टन तथा निर्यात आय 5000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगी। आगामी वित्त वर्ष में भी जीरा का निर्यात प्रदर्शन संतोषजनक रहने के आसार हैं।