नई दिल्ली। Jeera Crop: चालू सप्ताह के दौरान जीरा बाजार में मिला जुला व्यापार रहा। सप्ताह के शुरू में कीमतों में तेजी बनने के पश्चात सप्ताह के अंत में कीमतों में नरमी रही। उल्लेखनीय है कि उत्पादक केन्द्रों पर इस वर्ष जीरा बिजाई क्षेत्रफल में कमी आने के कारण इस वर्ष पैदावार में कमी आएगी।
प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात की ऊंझा मंडी में नए मालों की आवक शुरू हो जाने एवं आगामी सप्ताह से गुजरात की अन्य मंडियों में भी नए मालों की आवक शुरू हो जाने के पश्चात अभी कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है। आगामी दिनों में अभी बाजार मंदे रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि गुजरात में इस वर्ष जीरे की बिजाई 4.07 लाख हेक्टेयर पर की गई है जबकि गत वर्ष बिजाई का क्षेत्रफल 4.76 लाख हेक्टेयर का रहा था। राजस्थान में इस वर्ष बिजाई 20/25 प्रतिशत कम रहने के समाचार मिल रहे हैं।
राजस्थान की मंडियों में नए जीरे की आवक मार्च माह में शुरू होगी। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष देश में जीरे की कुल बिजाई 11.71 लाख हेक्टेयर की रही थी जबकि वर्ष 2024 में बिजाई का क्षेत्रफल 12.64 लाख हेक्टेयर कम रहा था।
स्टॉक पर्याप्त
चालू सीजन के दौरान निर्यात कम होने के कारण उत्पादक केन्द्रों पर जीरे का स्टॉक पर्याप्त है। सूत्रों का कहना है कि उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर वर्तमान में 15/16 लाख बोरी का स्टॉक होने के अनुमान है इसके अलावा किसानों के पास भी 8/10 लाख बोरी का स्टॉक माना जा रहा है।
तेजी-मंदी
जानकार सूत्रों का कहना है कि हाल-फिलहाल जीरे की कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है। बशर्तें उत्पादक केन्द्रों पर मौसम अनुकूल बना रहे। क्योंकि गुजरात की मंडियों में अब आवक बढ़ने लगेगी। लेकिन भावों में अधिक मन्दा भी संभव नहीं है। क्योंकि दूसरे वर्ष भी देश में जीरा उत्पादन घटने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर जीरे के भाव 4000/4500 रुपए प्रति 20 किलो के बोले जा रहे हैं। जोकि नए मालों की आवक का दबाव बनने पर 3800/4200 रुपए प्रति 20 किलो बन सकता है वर्तमान में ऊंझा मंडी में नए मालों की आवक 100/150 बोरी एवं पुराने की 10/11 हजार बोरी की हो रही है।
उत्पादन घटेगा
उत्पादक केन्द्रों से मिल रहे बिजाई समाचारों को देखते हुए संभावना व्यक्त की जा रही है कि दूसरे वर्ष भी देश में जीरा उत्पादन में गिरावट आएगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 के दौरान देश में जीरे का कुल उत्पादन 1.10 करोड़ बोरी का रहा था जोकि वर्ष 2025 में घटकर 90/92 लाख बोरी (प्रत्येक बोरी 55 किलो) रह गया। चालू सीजन के दौरान बिजाई घटने के कारण संभावना व्यक्त की जा रही है कि वर्ष 2026 के दौरान जीरा उत्पादन 80/82 लाख बोरी तक ही सिमट जाएगा। बशर्तें आगामी दिनों में मौसम फसल के अनुकूल रहे।
निर्यात कम
चीन एवं बांग्ला देश की कमजोर मांग के कारण चालू सीजन के प्रथम सात माह में मात्रात्मक रूप में जीरा निर्यात 13 प्रतिशत घटा है जबकि निर्यात भाव कम होने के कारण आय में भी 27 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-अक्टूबर-2025 के दौरान जीरा का निर्यात 126916 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 2955.81 करोड़ की रही।
जबकि अप्रैल-अक्टूबर- 2024 के दौरान जीरा का निर्यात 146558 टन का रहा था और आय 4036.51 करोड़ की रही थी। हालांकि नवम्बर 2025 के दौरान जीरा निर्यात गत वर्ष की तुलना में अधिक रहा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नवम्बर- 2025 में जीरा निर्यात 15301 टन का हुआहै। जबकि नवम्बर- 2024 में निर्यात 12643 टन का रहा था। वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) के दौरान जीरा का कुल निर्यात 229881.67 टन का हुआ था और निर्यात से प्राप्त आय 6178.86 करोड़ की रही थी।

