Inflation: अक्तूबर में थोक महंगाई -1.21% घटी, खाद्य और ऊर्जा कीमतों में नरमी

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नई दिल्ली। भारत की थोक महंगाई चौथे महीने भी नकारात्मक क्षेत्र में रही। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) में पिछले महीने की तुलना में अक्तूबर 2025 में (-) 1.21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

कीमतों में गिरावट मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, बिजली, खनिज तेलों और मूल धातुओं की कीमतों में कमी के कारण हुई। मंत्रालय ने बताया कि अक्तूबर में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) में महीने-दर-महीने बदलाव सितंबर 2025 की तुलना में (-) 0.06 प्रतिशत रहा।

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में औसत बदलाव को मापता है। नकारात्मक महंगाई दर यानी अपस्फीति का मतलब है कि पिछले साल की तुलना में कई अहम वस्तुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इसका सीधा संकेत है कि थोक बाजार में सामान पहले की तुलना में सस्ता हुआ है।

अक्तूबर 2025 में, प्राथमिक वस्तुओं का सूचकांक, जिसका भारांश 22.62 प्रतिशत है, सितंबर के 189.0 से 0.42 प्रतिशत गिरकर 188.2 पर आ गया। मंत्रालय ने बताया कि कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 3.13 प्रतिशत की गिरावट आई। वहीं गैर-खाद्य वस्तुओं में 1.73 प्रतिशत की गिरावट आई। हालांकि, खनिजों की कीमतों में 1.72 प्रतिशत की वृद्धि हुई, और खाद्य वस्तुओं में कोई बदलाव नहीं आया।

क्या कहते हैं आंकड़े
64.23 प्रतिशत भारांश के साथ थोक मूल्य सूचकांक में सबसे बड़ा योगदान देने वाले विनिर्मित उत्पाद समूह में 0.07 प्रतिशत की मामूली गिरावट देखी गई, जिससे सूचकांक 145.2 से 145.1 पर आ गया। 22 उद्योग समूहों में से, सात में कीमतों में गिरावट आई, ग्यारह में वृद्धि हुई और चार में कोई बदलाव नहीं हुआ। मूल धातुओं, रसायनों, मोटर वाहनों और मुद्रण उत्पादों जैसी वस्तुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि वस्त्र, खाद्य उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो गए।

जीएसटी सुधारों का पड़ा असर
जीएसटी सुधारों के बाद थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में गिरावट अपेक्षित स्तर पर है। कर कटौती से वस्तुओं की कीमतें कम हुईं व पिछले वर्ष की अनुकूल मुद्रास्फीति आधार के कारण थोक और खुदरा मुद्रास्फीति दोनों में कमी आई।

आरबीआई पर ब्याज दरों में कटौती का दबाव बढ़ा
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), जो खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है, ने पिछले महीने बेंचमार्क नीतिगत दरों को 5.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा था। खुदरा और थोक मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति में गिरावट से आरबीआई पर 3-5 दिसंबर को होने वाली अगली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में बेंचमार्क ब्याज दरों में कटौती करने का दबाव बनेगा।