नई दिल्ली। भारत और अमेरिका ने ‘महाडील’ की पूरी पिच तैयार कर ली है। शनिवार को दोनों ने आधिकारिक तौर पर अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क का ऐलान किया। यह समझौता चीन के दबदबे को चुनौती देगा।
इस डील के मार्च 2026 के मध्य तक फाइनल होने की उम्मीद है। यह व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) का शुरुआती कदम है। अमेरिका के साथ भारत की यह डील चीन की बेचैनी बढ़ाएगी। यह चीन के खिलाफ सप्लाई चेन को मजबूत करेगी।
साथ ही भारत को दुनिया के सबसे बड़े पावरसेंटर में अपने सामान को किफायती कीमतों पर बेचने का मौका देगी। भारत ने सबकुछ ठीक किया तो वह दुनिया पर राज कर सकता है। यूरोपीय संघ (ईयू) के बाद अमेरिका के साथ ट्रेड डील उसे दुनिया पर छा जाने का मौका देते हैं।
नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने भी अंतिम फ्रेमवर्क पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क टेक्सटाइल, फार्मा, रत्न और फुटवियर जैसे सेक्टर में भारतीय निर्यात के लिए बड़े अवसर खोलता है।
शनिवार को भारत और अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर अंतरिम व्यापार समझौते के लिए फ्रेमवर्क की घोषणा की। इसके पीछे मंशा आपसी टैरिफ में कमी करना है ताकि द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाया जा सके। यह व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का रास्ता साफ करेगी।
भारत को इस डील से सीधा फायदा होगा। अमिताभ कांत के मुताबिक, अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क भारत को वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के मुकाबले कॉम्पिटिटिव बढ़त देता है। यही नहीं, कृषि और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा भी करता है।
कांत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ‘भारत और अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते से भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है। इससे हमारे निर्यातकों के लिए टेक्सटाइल, फार्मा, रत्न, फुटवियर और अन्य क्षेत्रों में बड़े अवसर खुलेंगे।
भारत को वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिद्वंद्वियों पर कॉम्पिटिटिव बढ़त मिलेगी। साथ ही हमारे कृषि और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा होगी। लाखों नई नौकरियां (खासकर महिलाओं और युवाओं के लिए) पैदा होंगी। डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेक-इन-इंडिया पहलों को बढ़ावा मिलेगा।’
चीन की बढ़ेगी बेचैनी
कांत ने इस अंतरिम समझौते को एक ‘रणनीतिक जीत’ करार दिया है। यह चीन के खिलाफ सप्लाई चेन को मजबूत करता है। साथ ही रुपये की स्थिरता को भी सपोर्ट करता है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह समझौता चीन के दबदबे को चुनौती देगा। कांत ने लिखा, ‘यह एक रणनीतिक जीत है जो चीन के खिलाफ सप्लाई चेन को मजबूत करती है। रुपये की स्टेबिलिटी को सपोर्ट करती है। पीएम नरेंद्र मोदी को उनके साहसिक नेतृत्व और विजन के लिए बहुत-बहुत बधाई। पीयूष गोयल को उनकी लगन और गतिशीलता के लिए और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल को उनके दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के लिए मेरी शुभकामनाएं। आपसी फायदेमंद द्विपक्षीय संबंध विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।’

