नई दिल्ली। India-EU FTA: करीब दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आखिरकार इतिहास रच दिया। मंगलवार को दोनों पक्षों ने बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत पूरी होने की घोषणा की।
यह समझौता हाल के सालों के सबसे बड़े वैश्विक व्यापार सौदों में से एक माना जा रहा है। इस समझौते के साथ भारत और EU के बीच व्यापार के दरवाजे पहले से कहीं ज्यादा खुल जाएंगे।
EU ने भारत से आने वाले लगभग 99.5 प्रतिशत सामानों पर आयात शुल्क कम करने या पूरी तरह खत्म करने का फैसला किया है। इसके बदले भारत भी EU से आने वाले 97 प्रतिशत उत्पादों पर टैक्स में राहत देगा।
समझौता लागू होते ही भारत अपने और EU के बीच होने वाले व्यापार के 30 प्रतिशत हिस्से पर शुल्क शून्य कर देगा। अगले 10 सालों में यह दायरा बढ़ते हुए 93 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। दूसरी ओर EU पहले ही दिन से भारत के 90 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क हटा देगा, जबकि बाकी शुल्क सात साल में खत्म होंगे।
करीब दो दशकों से चली बातचीत के बाद हुए इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है, क्योंकि इससे लगभग 2 अरब लोगों का साझा बाजार बनेगा।
फिलहाल भारत-EU वस्तु व्यापार करीब 136 अरब डॉलर है, जो समझौते के लागू होने के 3–4 साल में 200 अरब डॉलर से ऊपर जा सकता है। वहीं सेवाओं का व्यापार, जो अभी 80–85 अरब डॉलर है, उसी अवधि में 125 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ऑटो और स्टील को छोड़कर भारत के लगभग 93% से ज्यादा सामान को EU में जीरो ड्यूटी लगेगी। बाकी 6% से ज्यादा वस्तुओं पर टैरिफ में कटौती और कोटा-आधारित रियायतें (जैसे ऑटोमोबाइल) दी जाएंगी।
EU, FTA लागू होने के पहले ही दिन भारत से आने वाले 90% सामान पर आयात शुल्क खत्म कर देगा। करीब 3% सामान पर शुल्क सात साल में चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि इस तरह ट्रेड वैल्यू के 99.5% हिस्से पर EU भारत को रियायतें देगा।
ड्यूटी-फ्री पहुंच पाने वाले प्रमुख भारतीय क्षेत्र
टेक्सटाइल्स, परिधान, कपड़े, समुद्री उत्पाद, रसायन, प्लास्टिक, रबर, चमड़ा व फुटवियर, बेस मेटल्स, रत्न व आभूषण, फर्नीचर, खिलौने और खेल सामग्री। फिलहाल इन पर EU में 0 से 26% तक शुल्क लगता है।
सेवाओं के क्षेत्र में EU ने भारत को अब तक की अपनी सबसे बेहतर पेशकश दी है। 155 में से 144 सब-सेक्टर खोले गए हैं, जबकि भारत 102 सब-सेक्टर EU के लिए खोलेगा। इसमें छात्रों की आवाजाही और पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा से जुड़े कुछ प्रावधान भी शामिल हैं।
FTA में डिजिटल ट्रेड, स्वच्छता और फाइटोसैनिटरी उपाय, तकनीकी बाधाएं और बौद्धिक संपदा अधिकार पर चैप्टर शामिल हैं। हालांकि ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स और सरकारी खरीद पर कोई चैप्टर नहीं है।
0.1% पर आ जाए जाएगा EU का औसत टैरिफ
EU का औसत टैरिफ पहले से ही 3.8% के आसपास है, जो समझौते के बाद भारत के लिए घटकर 0.1% रह जाएगा। कुछ क्षेत्रों जैसे समुद्री उत्पाद, रसायन, प्लास्टिक और रबर में ज्यादा शुल्क हैं, जिन्हें EU भारत के लिए पूरी तरह हटाएगा।
इन क्षेत्रों से भारत का निर्यात 2024 में 35 अरब डॉलर था। इसमें से 33.5 अरब डॉलर के सामान पर पहले ही दिन शुल्क हटेगा, और बाकी पर 3, 5 और 7 साल में शून्य हो जाएगा।
ऑटो सेक्टर में कोटा-आधारित रियायत
ऑटोमोबाइल सेक्टर में दोनों पक्षों ने कोटा-आधारित रियायतों पर सहमति बनाई है। भारत में 25 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों (पेट्रोल, डीजल, हाइब्रिड) को EU भारत में निर्यात नहीं करेगा; वे चाहें तो यहां मैन्युफैक्चरिंग कर सकते हैं।
25 लाख रुपये से ऊपर के सेगमेंट में EU का इंटरेस्ट ज्यादा है। फिलहाल भारत में कारों पर आयात शुल्क 66% से 125% तक है और कोटा से बाहर कोई रियायत नहीं दी जाएगी। इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए कोटा समझौते के पांचवें साल से शुरू होगा। कुछ सेगमेंट में शुल्क 35% और कुछ में 30% से शुरू होकर धीरे-धीरे घटेगा।
डेयरी, अनाज पर कोई रियायत नहीं
भारत डेयरी (पनीर सहित), सोया मील और अनाज पर कोई रियायत नहीं देगा। वहीं, EU भी चीनी, बीफ, मांस और पोल्ट्री क्षेत्रों की सुरक्षा करेगा। भारत को EU में टेबल ग्रेप्स के लिए कोटा-आधारित ड्यूटी कटौती मिली है। EU हर साल करीब 1.4 अरब डॉलर के टेबल ग्रेप्स आयात करता है।
अधिकारी के मुताबिक, भारत को करीब 1 अरब डॉलर (85,000 टन) के अंगूरों पर ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी। वाइन पर भारत सात साल में शुल्क 150% से घटाकर 20% करेगा। 2.5 यूरो से कम कीमत वाली वाइन पर कोई रियायत नहीं होगी।

