Income Tax Rule: आप सीनियर सिटीजन हैं तो अब ये फॉर्म करेगा आपकी मदद

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नई दिल्ली। Income Tax Rule: टैक्स से जुड़ी छोटी-छोटी बातें अक्सर बड़ी उलझन बन जाती हैं, और फॉर्म 15G व 15H इसी का सबसे बड़ा उदाहरण रहे हैं। हर साल लोगों के सामने यही सवाल होता था कि कौन सा फॉर्म भरें और कहीं इसमें गलती न हो जाए। लेकिन अब नए फाइनेंशियल ईयर के साथ यह कन्फ्यूजन लगभग खत्म हो गया है।

सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए दोनों फॉर्म्स की जगह एक ही फॉर्म 121 लागू कर दिया है, जिससे प्रक्रिया काफी आसान हो गई है। अब उम्र के आधार पर अलग-अलग फॉर्म चुनने की जरूरत नहीं होगी और लोगों के के लिए TDS से जुड़ी औपचारिकताएं पहले से ज्यादा आसान और स्पष्ट हो जाएंगी। यह बदलाव नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत आया है, जो लोगों के लिए चीजों को काफी आसान बना रहा है।

पहले का सिस्टम क्या था
पुराने नियमों में बात साफ तो थी, लेकिन थोड़ी बंटी हुई थी। जिन लोगों की उम्र 60 साल से कम थी, वो फॉर्म 15G भरते थे। वहीं सीनियर सिटीजन, यानी 60 साल या उससे ज्यादा उम्र वाले, फॉर्म 15H का इस्तेमाल करते थे। दोनों का मकसद एक ही था कि अगर आपकी कुल आमदनी टैक्स की सीमा से कम है, तो बैंक डिपॉजिट, पोस्ट ऑफिस स्कीम या ऐसी ही आय पर TDS न कटे।

कई बार लोगों को उम्र और नियमों को लेकर कन्फ्यूजन हो जाता था। खासकर जब कोई सीनियर सिटीजन पहली बार फॉर्म भरते ते, तो उन्हें समझ नहीं आता था कि 15G भरें या 15H। अब ये परेशानी खत्म हो गई है। नया फॉर्म 121 सभी के लिए एक जैसा है, उम्र चाहे कुछ भी हो।

फॉर्म 121 क्या है और इसे क्यों लाया गया

  • फॉर्म 121 एक ऐसा सेल्फ डिक्लेरेशन है, जिसमें आप खुद बताते हैं कि इस साल आपकी अनुमानित कुल आय टैक्स की सीमा से कम है। इसके बाद बैंक या जो भी संस्था आपको आय दे रही है, वह आपकी आय पर TDS नहीं काटती।
  • इसमें आमतौर पर बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज, पोस्ट ऑफिस की स्कीम्स, म्यूचुअल फंड्स की इनकम, डिविडेंड और रेंट जैसी आय शामिल होती है। PF विड्रॉल, पेंशन और इंश्योरेंस कमीशन जैसी चीजें भी इसमें कवर होती हैं। पहले की तरह, अगर आपकी टैक्स देनदारी जीरो रहने की उम्मीद है, तो अगले AY से आप यह फॉर्म भर सकते हैं।
  • नया फॉर्म 121 अब पुराने 15G और 15H की जगह ले चुका है, लेकिन इसका मकसद वही है, बिना जरूरत के TDS कटने से बचाना। अब सीनियर सिटीजन को अलग फॉर्म ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि सबके लिए एक ही फॉर्म से काम हो जाएगा।

कौन भर सकता है फॉर्म 121
यह फॉर्म रेजिडेंट इंडिविजुअल्स के लिए है, उम्र 60 से कम हो या ज्यादा, दोनों ही इसे भर सकते हैं, वहीं हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) भी इसका इस्तेमाल कर सकती है अगर वे तय शर्तें पूरी करते हैं। हालांकि, कंपनियां, फर्म्स या पार्टनरशिप इसे इस्तेमाल नहीं कर सकतीं और नॉन-रेजिडेंट्स भी इसके दायरे में नहीं आते। सबसे जरूरी बात यह है कि आपकी पूरे साल की अनुमानित कुल आय टैक्स की सीमा से कम होनी चाहिए।

फॉर्म दो हिस्सों में बंटा होता है, पहला हिस्सा आप खुद भरते हैं जिसमें नाम, PAN, पता, जन्मतिथि, संपर्क डिटेल्स, किस तरह की आय पर TDS नहीं काटना है, उसकी अनुमानित रकम और कुल आमदनी की जानकारी देनी होती है। कुछ मामलों में पिछले दो साल के ITR की डिटेल्स भी देनी पड़ सकती हैं। वहीं दूसरा हिस्सा पेयर यानी जैसे बैंक भरता है, जिसमें वह डिक्लेरेशन मिलने की जानकारी दर्ज करता है, और PAN देना अनिवार्य होता है, वरना फॉर्म मान्य नहीं माना जाएगा।

क्या-क्या लगेगा फॉर्म भरने के लिए
फॉर्म 121 जमा करने के लिए आपका पैन कार्ड होना जरूरी है। इसके साथ आपको उस इनकम या इनवेस्टमेंट की जानकारी देनी होगी, जिस पर आप TDS नहीं कटवाना चाहते। अगर आपकी आय ब्याज से जुड़ी है, तो बैंक अकाउंट की डिटेल्स भी मांगी जा सकती हैं। कुछ मामलों में उम्र का प्रमाण (age proof) भी देना पड़ सकता है, लेकिन अब उम्र के हिसाब से अलग-अलग फॉर्म नहीं भरने पड़ते।

यह फॉर्म हर टैक्स ईयर में नया भरना होगा, यानी एक बार भरकर यह हर साल के लिए मान्य नहीं होगा। इसलिए ध्यान रखें कि इसे पेयर को देने से पहले या आय मिलने से पहले ही जमा कर दें। नया फॉर्म 121 इनकम टैक्स एक्ट 2025 की धारा 393(6) और इनकम टैक्स रूल्स 2026 के रूल 211 के तहत लाया गया है। पहले इसी काम के लिए धारा 197A और रूल 29C के तहत फॉर्म 15G और 15H इस्तेमाल होते थे।

बैंक, पोस्ट ऑफिस या अन्य संस्थाएं अब फॉर्म 121 के आधार पर TDS नहीं काटेंगी, अगर डिक्लेरेशन सही हो। ये बदलाव उन लाखों टैक्सपेयर्स के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, जो हर साल छोटी-छोटी आमदनी पर अनावश्यक TDS से परेशान रहते थे।