नई दिल्ली। तमाम अमरीकी आग्रह और दबाव के बावजूद भारत अमरीका के मक्का एवं सोयाबीन के लिए अपना बाजार खोलने के लिए तैयार नहीं है। भारत में जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम) फसलों के उत्पादन, आयात कारोबार एवं उपयोग पर प्रतिबंध लगा हुआ है।
सिर्फ बीटी कॉटन ही इसका एक मात्र अपवाद है जिसे अखाद्य श्रेणी का उत्पाद माना जाता है। भारत सरकार अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करना चाहती है। उच्च सदस्य सूत्रों के अनुसार अमरीका में मुख्यतः जीएम वैरायटी के मक्का एवं सोयाबीन का उत्पादन होता है इसलिए भारत में इसके आयात की अनुमति देना फिलहाल संभव नहीं है।
इसके लिए सरकार को पहले नियमों में संशोधन- परिवर्तन करना पड़ेगा और भारतीय किसानों तथा पर्यावरण संगठनों को राजी करना होगा जो आसान बात नहीं है। यह सिद्धांत का मामला है और सरकार इस पर नरम रूख नहीं अपनाना चाहती है।
ध्यान देने की बात है कि द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के क्रम में अमरीका भारत पर लगातार इस बात के लिए दबाव डाल रहा है कि वह उसके सोयाबीन तथा मक्का के लिए अपने बाजार को पूरी तरह खोल दे।
अमरीका चाहता है कि भारत उससे सोयामील तथा मक्का का आयात बड़े पैमाने पर शुरू करे। लेकिन एक तो अमरीका में जीएम फसलों का उत्पादन होता है और दूसरे, आमतौर पर भारत को इसके आयात की जरूरत नहीं या नगण्य पड़ती है।
वर्ष 2024 में अमरीका दुनिया में मक्का का सबसे बड़ा तथा सोयाबीन का दूसरा सबसे प्रमुख निर्यातक देश बना रहा। चीन तथा मैक्सिको इसके दो सबसे बड़े खरीदार देश थे लेकिन अमरीकी टैरिफ नीति से मामला उलझ गया है।
चीन पहले से ही अमरीका के बजाए ब्राजील से सोयाबीन का आयात बढ़ा रहा है जबकि अमरीकी टैरिफ नीति के कारण उसे ब्राजीलियन सोयाबीन का आयात और भी बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ सकता है। इसे देखते हुए ट्रम्प प्रशासन भारत को एक बड़े वैकल्पिक बाजार के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है। लेकिन भारत की अपनी समस्या है।

