GDP Growth: भारत की अर्थव्यवस्था 26 में 7.4% की दर से बढ़ने की उम्मीद

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नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था वित्तीय वर्ष 2025-26 में 7.4% की शानदार दर से बढ़ने की उम्मीद है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने यह अनुमान जाह‍िर क‍िया है। घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के पहले एडवांस अनुमानों पर यह आधारित है।

यह ग्रोथ पिछले वित्तीय वर्ष की 6.5% की विकास दर से काफी अधिक है। नॉमिनल जीडीपी में भी 8% की ग्रोथ का अनुमान है। इस मजबूत विकास का मुख्य कारण सेवा क्षेत्र की दमदार चाल है। इससे वास्तविक जीवीए ग्रोथ 7.3% रहने की उम्मीद है। भारत की इस रफ्तार के आसपास कोई बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था नहीं है। इसमें अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी जैसे देश शामिल हैं।

सेवा क्षेत्र के भीतर वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं के साथ सार्वजनिक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं में 9.9% की मजबूत ग्रोथ का अनुमान है। व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और प्रसारण से संबंधित सेवाओं में 7.5% की ग्रोथ देखी जा सकती है। मैन्‍युफैक्‍चरिंग और कंस्‍ट्रक्‍शन जैसे सेकेंडरी सेक्‍टर में 7.0% की ग्रोथ का अनुमान है। कृषि और संबद्ध क्षेत्र में 3.1% की मीडिया ग्रोथ और बिजली, गैस, जल आपूर्ति जैसी उपयोगिता सेवाओं में 2.1% की बढ़ोतरी का अनुमान है।

वास्तविक निजी अंतिम उपभोग व्यय में 7.0% की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। सकल निश्चित पूंजी निर्माण (ग्रॉस फिक्‍सड कैपिटल फॉर्मेश्‍न) में 7.8% की ग्रोथ का अनुमान है। यह पिछले वित्तीय वर्ष के 7.1% से बेहतर है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी अपनी हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.3% लगाया था। आरबीआई के अनुसार, हाई फ्रीक्‍वेंसी वाले इंडिकेटर बताते हैं कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां तीसरी तिमाही में मजबूत बनी हुई हैं। हालांकि, कुछ प्रमुख संकेतकों में कमजोरी के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, ‘जीएसटी कटौती और त्योहारी सीजन से संबंधित खर्चों ने अक्टूबर-नवंबर के दौरान घरेलू मांग का समर्थन किया। ग्रामीण मांग मजबूत बनी हुई है। जबकि शहरी मांग धीरे-धीरे ठीक हो रही है। निवेश गतिविधि स्वस्थ बनी हुई है।

इसमें गैर-खाद्य बैंक कर्ज के विस्तार और ऊंची क्षमता उपयोग के कारण निजी निवेश में तेजी आ रही है। बाहरी मांग में नरमी के बीच अक्टूबर में माल निर्यात में तेज गिरावट आई। साथ ही सेवा निर्यात भी नरम रहा। सप्‍लाई साइड पर खरीफ फसल उत्पादन, जलाशयों के ऊंचे स्तर और बेहतर रबी फसल बुवाई से कृषि विकास को समर्थन मिल रहा है। मैन्‍युफैक्‍चरिंग गतिविधि में सुधार जारी है। जबकि सेवा क्षेत्र स्थिर रफ्तार बनाए हुए है।’

आगे देखते हुए आरबीआई ने कहा कि कई घरेलू फैक्‍टर आर्थिक प्रदर्शन को बढ़ावा देंगे। इनमें सकारात्मक कृषि संभावनाएं, जीएसटी सुधार के निरंतर लाभ, कम महंगाई, कॉर्पोरेट और वित्तीय संस्थानों की मजबूत बैलेंस शीट और अनुकूल मौद्रिक और वित्तीय स्थितियां शामिल हैं।

सुधार उपायों के निरंतर कार्यान्वयन से भी विकास को अतिरिक्त बढ़ावा मिलने की संभावना है। बाहरी मोर्चे पर सेवा निर्यात के मजबूत बने रहने की उम्मीद है। हालांकि, माल निर्यात को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वैश्विक अनिश्चितताएं जोखिम बनी हुई हैं। लेकिन, चल रही व्यापार और निवेश वार्ताओं का तेजी से पूरा होना सकारात्मक अवसर प्रदान कर सकता है।

यह अनुमान भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति और भविष्य में इसके और बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीदों को दिखाता है। सेवा क्षेत्र का नेतृत्व, मैन्‍युफैक्‍चरिंग और कंस्‍ट्रक्‍शन में सुधार के साथ मजबूत घरेलू मांग इस विकास को रफ्तार प्रदान करेंगे। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताओं पर नजर रखने की आवश्यकता होगी।