नई दिल्ली। FPI withdrew: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी रकम निकाल ली है। मार्च के पहले पखवाड़े में एफपीआई ने घरेलू इक्विटी बाजार से लगभग 52,704 करोड़ रुपये की निकासी की है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और ऊंची तेल कीमतों के कारण निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान कम हुआ है, जिसके चलते भारतीय बाजार से विदेशी पूंजी बाहर जा रही है।
डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में जारी बिकवाली से पहले फरवरी में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था। यह पिछले 17 महीनों में सबसे बड़ा मासिक निवेश था।
हालांकि इससे पहले तीन महीनों तक एफपीआई लगातार बिकवाली कर रहे थे। जनवरी में उन्होंने 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3,765 करोड़ रुपये की निकासी की थी।
मार्च में स्थिति फिर से पलट गई और 13 मार्च तक एफपीआई ने नकद बाजार में करीब 52,704 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। उल्लेखनीय है कि इस महीने अब तक हर कारोबारी दिन विदेशी निवेशक शुद्ध विक्रेता बने रहे हैं।
पश्चिम एशिया संकट बना मुख्य कारण
एंजेल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकार जावेद खान के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और लंबे समय तक संघर्ष की आशंका ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि यदि यह तनाव महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावित करता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि इसी आशंका के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जिससे बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
वकार जावेद खान के मुताबिक रुपये की कमजोरी भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है और यह डॉलर के मुकाबले करीब 92 रुपये के स्तर के आसपास बना हुआ है। इसके अलावा अमेरिका में बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर और पहले हुए निवेश के बाद मुनाफावसूली ने भी एफपीआई की बिकवाली को बढ़ावा दिया है।

