मुम्बई। भारतीय कस्टम विभाग के अधिकारियों ने मुम्बई के न्हावा शेवा बंदरगाह पर सूखे मेवे के एक कंटेनर शिप को पकड़ा है जिस पर अफगानिस्तान के माल के तौर पर चीन का अखरोट लदे होने का संदेह है। समझा जाता है कि इस अखरोट के बारे में भ्रामक जानकारी दी गई है।
चूंकि दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार संधि (साफ्टा) के अंतर्गत अफगानिस्तान से आयात होने वाले अखरोट पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगता है इसलिए इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए आयातक चीन के अखरोट को अफगानी मूल का बता रहे हैं।
न्हावा शेवा पोर्ट पर जिस जहाज- डब्ल्यू आई बी रेयफा को रोककर रखा गया है उस पर कोमोरोस का झंडा लगा हुआ है और कम से कम 46 कंटेनरों में माल लदा हुआ है। ऐसी सूचना मिल रही है कि इन कंटेनरों में चीन का अखरोट है जबकि इसे अफगानिस्तान का अखरोट बताने की कोशिश हो रही है। पहले इसे ईरानी अखरोट माना जा रहा था।
इस जहाज पर कुल मिलाकर 310 कंटेनर मौजूद है। इसके बारे में दावा किया जा रहा है कि यह जहाज ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह से माल लेकर रवाना हुआ था लेकिन भारतीय बंदरगाह पर पहुंचने के बाद कस्टम अधिकारियों ने इसे रोक लिया।
पिछले करीब दो सप्ताह से यह जहाज न्हावा शेवा का बंदरगाह पर खड़ा है और इस पर लदे माल के लिए पेश किए गए दस्तावेजों की जांच-पड़ताल की जा रही है। समझा जाता है कि इस दस्तावेज के आधार पर आयातक लगभग 50 करोड़ रुपए के सीमा शुल्क की बचत करने में सफल हो सकते है। दिलचस्प तथ्य यह है कि इस खेप की पहचान करने के लिए अभी तक कोई आयातक सामने नहीं आया है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इन 46 कंटेनरों की वजह से समूचे जहाज को रोककर रखा गया है। हैरत की बात है कि अखरोट से लदे सारे बॉक्स चीन से आये हैं और निर्यातकों ने पैकेज पर चीनी भाषा में लिखे विवरण को बदला भी नहीं है।
इस तरह की घटना पिछले कई वर्षों से लगातार हो रही है। अमरीका तथा चिली से आयातित अखरोट को अफगानी मूल का बता दिया जाता है ताकि शुल्क में छूट का लाभ मिल सके।

