नई दिल्ली। आगामी त्यौहारी सीजन को देखते हुए चने के भावों में सुधार की उम्मीद है। चना में 6600 की रेसिस्टेंस पर बाजार रुकने के बाद आगे और बढ़ सकते हैं, ध्यान रहे यह तेजी अक्टूबर तक की ही होगी।
पोर्ट पर धीरे-धीरे आयातित चना का स्टॉक खत्म होने को है। साथ ही घरेलू चना भी बड़े हाथों में है। भारत में चना की आवक कमजोर होने के कारण सभी ऑस्ट्रेलिया की फसल का इन्तजार कर रहे हैं, जो अक्टूबर में आएगी। इस वर्ष अच्छे उत्पादन की उम्मीद यही। बीच में एक छोटी फसल अफ्रीका से आयात भारत में होगी।
विदेशी बाजारों की बात करें तो तंजानिया का चना पहले सप्ताह में 5700, ऑस्ट्रेलिया का चना 5875 रुपए प्रति क्विंटल था, जो दूसरे सप्ताह में T-5800, A-5875 रुपए, तीसरे सप्ताह में T-6125, A-6275, चौथे सप्ताह में T-6250 A-6400 तथा चालू सप्ताह में भाव T-6225 से 50 बढ़कर 30 जुलाई को 6275 व सोमवार के भाव A-6350 से 50 रुपए बढ़कर A-6400 रुपए प्रति क्विटल पर पहुंच गया।
दिल्ली में चने ने जुलाई के प्रथम सप्ताह में 5825, दूसरे सप्ताह में 5900, तीसरे सप्ताह में 6200 व चौथे सप्ताह में 6450 रुपए प्रति क्विटल के उच्चतम स्तर को छुआ था। ऊंचे भावों पर मुनाफावसूली बिक्री होने से कीमतों में गिरावट देखी गयी।
परन्तु इस सप्ताह सोमवार को बाजार 6375 रुपए पर खुलकर 29 जुलाई 2025 को 6500 तथा 30 जुलाई 2025 को 6425 रुपए प्रति क्विटल पर बंद हुआ। कीमतों में अगर देखें तो जुलाई की शुरुआत से अब तक 200 रुपए प्रति क्विटल की तेजी आई। मंडियों में इस समय चना की आवक बेहद कमजोर है, त्यौहारी मांग बराबर बनी हुई है, और विदेशों से भी आयात नहीं हो होने से चने में तेजी का माहौल है।

