CBSE 10वीं के छात्रों को पहली परीक्षा देना अनिवार्य, जानिए क्या है नियम

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नई दिल्ली। सीबीएसई ने साफ किया है कि दसवीं में दूसरी बोर्ड परीक्षा में छात्रों को तभी मौका मिलेगा, जब उन्होंने पहली बार परीक्षा अनिवार्य रूप से दी हो। बोर्ड ने साफ किया कि दूसरी बोर्ड परीक्षा में सिर्फ प्रदर्शन सुधारने का अवसर मिलेगा।

सीबीएसई ने दसवीं में इस बार दो बोर्ड परीक्षाओं की नीति को लेकर यह स्पष्टीकरण दिया है। दरअसल, हाल में बोर्ड को कई आवेदन मिले, जिनमें छात्रों ने कई कारणों से पहली परीक्षा में नहीं बैठ पाने की बात कहते हुए दूसरी परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मांगी थी।

परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने बताया कि दूसरी बार में सिर्फ तीन विषयों की परीक्षा दे सकेंगे। छात्र विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषा में से कोई तीन विषय चुन सकेंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र पहली बोर्ड परीक्षा में तीन या उससे अधिक विषयों की परीक्षा नहीं देता है तो उसे दूसरी परीक्षा में शामिल होने का मौका नहीं मिलेगा। ऐसे छात्र ‘एसेंशियल रिपीट’ श्रेणी में रखे जाएंगे। उन्हें अगले साल मुख्य बोर्ड परीक्षा में ही बैठ सकेंगे।

जिन विद्यार्थियों का परिणाम प्रथम परीक्षा में कम्पार्टमेंट आता है, उन्हें द्वितीय परीक्षा में कम्पार्टमेंट श्रेणी के अंतर्गत बैठने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह अधिसूचना परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उल्लेखनीय है कि सीबीएसई 2026 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 10वीं के लिए साल में दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया था।

भारद्वाज ने कहा, ‘कक्षा 10वीं उत्तीर्ण करने के बाद अतिरिक्त विषय की अनुमति नहीं दी जायेगी। यदि किसी भी कारण से कोई छात्र मुख्य परीक्षा में तीन या अधिक विषयों में उपस्थित नहीं हो पाता है, तो नीति के अनुसार उसे द्वितीय बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इस संबंध में सीबीएसई को प्राप्त किसी भी अनुरोध का जवाब नहीं दिया जायेगा।”

कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं मंगलवार से शुरू होंगी, जिसमें भारत और विदेश से 46 लाख से अधिक छात्र शामिल होंगे। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत, बोर्ड परीक्षाओं के संबंध में कई सिफारिशें की गई हैं, जिनमें इन्हें साल में दो बार आयोजित करना शामिल है। एनईपी 2020 में कहा गया है कि बोर्ड और दाखिला परीक्षाओं की मौजूदा प्रणाली में सुधार किया जायेगा ताकि कोचिंग कक्षाओं में शामिल होने की आवश्यकता समाप्त हो जाये।

अनिवार्य उपस्थिति
पहली परीक्षा के मुख्य विषयों (विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषा) में से कम से कम तीन में शामिल होना जरूरी।

दूसरी परीक्षा का लाभ: पहली परीक्षा में सफल छात्र ही किन्हीं तीन विषयों में प्रदर्शन सुधार के लिए दूसरी परीक्षा दे सकेंगे।

कंपार्टमेंट नियम-
पहली परीक्षा में कंपार्टमेंट पाने वाले छात्र ‘कंपार्टमेंट’ श्रेणी के तहत दूसरी परीक्षा में बैठ सकेंगे।

  • नो एडिशनल सब्जेक्ट
    10वीं पास करने के बाद किसी अतिरिक्त विषय की अनुमति नहीं दी जाएगी।
  • 12वीं बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए नियम
    क्लास 12 पास करने के बाद स्टूडेंट्स के पास अपना ओवरऑल परसेंटेज सुधारने के क्या ऑप्शन हैं?

स्टूडेंट्स क्लास 12 में अपनी ओवरऑल परफॉर्मेंस इन तरीकों से सुधार सकते हैं-

  • मेन एग्जाम के बाद सप्लीमेंट्री एग्जाम में, जो जुलाई 2026 में होगा। इस समय वे सिर्फ एक सब्जेक्ट में परफॉर्मेंस सुधार सकते हैं।
  • अगर कोई स्टूडेंट इम्प्रूवमेंट के लिए एक से ज्यादा सब्जेक्ट में शामिल होना चाहता है, तो वह अगले साल फरवरी में होने वाले मेन एग्जाम में ही ऐसा कर सकता है।
  • क्या क्लास 12 के स्टूडेंट्स भी क्लास 10 की तरह दो बार बोर्ड एग्जाम दे सकते हैं?
  • नहीं। CBSE ने सिर्फ क्लास 10 के लिए ‘दो एग्जाम’ पॉलिसी बनाई है।