Budget: 1 अप्रैल से बदलेगा आयकर कानून, आपकी कमाई व बचत पर क्या होगा असर

0
6

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए ‘विकसित भारत’ की नींव को और मजबूत करने का रोडमैप साझा किया है।

‘युवा शक्ति’ और आर्थिक स्थिरता पर केंद्रित इस बजट का कुल आकार लगभग 53.5 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। सरकार ने विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे और मैन्युफैक्चरिंग पर सरकारी खजाना खोल दिया है, वहीं राजकोषीय अनुशासन को भी प्राथमिकता दी है।

सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है, जो चालू वित्त वर्ष के 4.4 प्रतिशत के संशोधित अनुमान से कम है।

विदेश यात्रा और टैक्स फाइलिंग पर राहत
आम करदाताओं और मध्यम वर्ग को राहत देते हुए वित्त मंत्री ने विदेश यात्रा और शिक्षा को किफायती बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने विदेश यात्रा पैकेज की बिक्री पर टीसीएस की दर को 5 से 20 प्रतिशत के स्लैब से घटाकर सीधे 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया है। यही राहत लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत शिक्षा और चिकित्सा के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर भी दी गई है, जहाँ अब टीसीएस की दर 2 प्रतिशत होगी। इसके अलावा, टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को लचीला बनाते हुए ‘रिवाइज्ड रिटर्न’ दाखिल करने की समयसीमा 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है। वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की है कि व्यापक समीक्षा के बाद तैयार किया गया ‘आयकर अधिनियम 2025’ आगामी 1 अप्रैल 2026 से प्रभाव में आएगा।

F&O और बायबैक पर सख्ती
शेयर बाजार के निवेशकों और विशेषकर ट्रेडर्स के लिए बजट के प्रावधान थोड़े सख्त रहे हैं। सरकार ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स में बढ़ोतरी की घोषणा की है। फ्यूचर्स पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस पर 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, कंपनियों द्वारा शेयरों के बायबैक से होने वाली आय को अब शेयरधारकों के हाथों में ‘कैपिटल गेन्स’ माना जाएगा और उसी अनुसार टैक्स लगाया जाएगा। हालांकि, प्रमोटर्स द्वारा टैक्स आर्बिट्राज को रोकने के लिए उन पर अतिरिक्त बायबैक टैक्स लगाने का भी प्रावधान किया गया है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी
बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में पूंजीगत व्यय का लक्ष्य बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है, जो पिछले बजट के 11.2 लाख करोड़ रुपये के आवंटन से अधिक है। शहरी विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए देश के प्रमुख शहरों के बीच 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव है, जिसमें मुंबई-पुणे और दिल्ली-वाराणसी जैसे रूट शामिल हैं। इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में जोखिम कम करने के लिए एक ‘इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड’ स्थापित किया जाएगा और शहरों को आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनाने के लिए ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन्स’ की मैपिंग की जाएगी।

उद्योग और इनोवेशन के लिए ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’
औद्योगिक विकास और इनोवेशन के लिए सरकार ने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत कई बड़ी घोषणाएं की हैं। भारत को बायो-फार्मा मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाने के लिए ‘बायो-फार्मा शक्ति’ योजना और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ का ऐलान किया गया है। एमएसएमई सेक्टर को मदद देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का एक समर्पित ‘एसएमई ग्रोथ फंड’ बनाया जाएगा और TReDS प्लेटफॉर्म के जरिए उनकी क्रेडिट तक पहुंच आसान की जाएगी। स्वास्थ्य सेवा को किफायती बनाने के लिए कैंसर के मरीजों के लिए 17 जीवन रक्षक दवाओं और औषधियों को बेसिक कस्टम ड्यूटी से पूरी तरह छूट दी गई है।