इडुक्की। Black Pepper: दक्षिण भारत में सबरीमाला का सीजन कालीमिर्च के कारोबार एवं भाव सुधार की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। वहां पोंगल का त्यौहार भी आरंभ हो गया है। सबरीमाला तीर्थ यात्रा का सीजन खासकर इडुक्की के कालीमिर्च उत्पादकों को काफी राहत देने वाला होता है।
दरअसल इस सीजन में आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तीर्थ यात्री बड़ी संख्या में सबरीमाला मंदिर में दर्शन तथा पूजा अर्चना के लिया जाते है और वहां से लौटते समय आधा किलो या एक किलो के पैकेट में कालीमिर्च की खरीद करते हैं। तीर्थ यात्रियों द्वारा विशाल मात्रा में खरीद करने से कालीमिर्च का दाम भी तेज हो जाता है।
फिलहाल इडुक्की और इसके आसपास के क्षेत्रों में कालीमिर्च का भाव 700 रुपए प्रति किलो के आसपास चल रहा है जबकि कुछ रास्तों पर 500 ग्राम का पैके इस ऊंचे मूल्य पर बेचा जा रहा है। स्थानीय उत्पादकों को इससे भारी कमाई हो रही है।
ध्यान देने की बात है कि कोच्चि के टर्मिनल मार्केट में कालीमिर्च का दाम गार्बल्ड श्रेणी के लिए 712 रुपए प्रति किलो तथा अन गार्बल्ड किस्म के लिए 692 रुपए प्रति किलो चल रहा है जबकि केरल के इडुक्की में सबरीमाला मंदिर के रास्ते में इसका दाम उछलकर 1300-1400 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है।
समझा जाता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस वर्ष कालीमिर्च की नई फसल की तुड़ाई-तैयारी में देर हो रही है और इसलिए सबरीमाला सीजन की जोरदार मांग निकलने से केरल के इडुक्की, पठानमथिट्टा तथा कोट्टायम जैसे प्रमुख उत्पादक जिलों के उत्पादकों एवं डीलर्स को खुदरा रूप में काफी ऊंचे दाम पर अपनी कालीमिर्च का बकाया स्टॉक बेचने में अच्छी सफलता मिल रही है।
लेकिन आसमान पर बादल छाए रहने तथा धूप का अभाव होने से कालीमिर्च के उत्पादकों को अपना माल सुखाने का अवसर नहीं मिल रहा है और वे अपरिपक्व या कच्चे दाने की बिक्री करने के लिए विवश हो रहे हैं।

