मुक्त व्यापार समझौतों से भारत को 1 लाख करोड़ के सीमा शुल्क का नुकसान

0
8

नई दिल्ली। बजट दस्तावेजों के मुताबिक अब तक हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के तहत तरजीही शुल्क के कारण भारत को वित्त वर्ष 2027 में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक सीमा शुल्क का नुकसान हो सकता है।

वित्त वर्ष 2026 में मुक्त व्यापार समझौतों के कारण मिली शुल्क छूट के कारण देश का सीमा शुल्क से राजस्व नुकसान 98,569 करोड़ रुपये था, जो उस वर्ष के लिए 94,172 करोड़ रुपये के बजट अनुमान से अधिक है।

वित्त वर्ष 2027 में दक्षिण एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के साथ हुए समझौते के कारण सीमा शुल्क घाटा सबसे अधिक 40,833 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। आसियान के साथ भारत से निर्यात की तुलना में आयात बहुत तेजी से बढ़ा है, जिसके कारण भारत ने व्यापार समझौते की तत्काल जरूरत पर जोर दिया है।

अगस्त 2023 में दोनों पक्ष 2025 तक मौजूदा समझौते की समीक्षा पूरी करने को सहमत हुए थे। बहरहाल यह तिथि बीत चुकी है और समीक्षा नहीं हो पाई। समीक्षा की सुस्त प्रक्रिया को लेकर भारत ने नाखुशी जाहिर की है।

अन्य देशों में जापान (11,365 करोड़ रुपये), दक्षिण कोरिया (10,872 करोड़ रुपये) और ऑस्ट्रेलिया (5107 करोड़ रुपये) शामिल हैं, जिनके साथ एफटीए के कारण राजस्व का बड़ा नुकसान होने वाला है।

मई 2022 में लागू हुए भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हुए व्यापार समझौते के कारण वित्त वर्ष 2027 में सीमा शुल्क से राजस्व नुकसान 9,267 करोड़ रुपये होने वाला है।भारत का सबसे पसंदीदा देश (एमएफएन) शुल्क कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक बना हुआ है। खासकर कृषि, वाहन, कुछ उपभोक्ता वस्तुओं के मामले में यह अधिक है।

इसकी वजह से एफटीए वार्ता में सामान्यतया भारत को शुल्क में उल्लेखनीय कटौती करनी पड़ती है, जिससे कारोबार के हिसाब से व्यावहारिक बाजार पहुंच मिल सके। समय बीतने के साथ ज्यादा वस्तुएं व सेवाएं तरजीही शुल्क के दायरे में आ रही हैं और आयात की मात्रा बढ़ रही है, ऐसे में काल्पनिक राजस्व का असर बढ़ जाता है।

इस मसले पर लंबे समय से आंतरिक बहस चल रही है। इसके पहले राजस्व विभाग के अधिकारियों ने तर्क दिया था कि शुल्क में ज्यादा कटौती करने से सीमा शुल्क संग्रह कम हो रहा है, जो हाल के वर्षों में केंद्र के सकल कर राजस्व का 6 से 7 प्रतिशत है।

वहीं व्यापार संबंधी नीति निर्माताओं का कहना है कि सीमा शुल्क को प्राथमिक रूप से व्यापार नीति के साधन के रूप में डिजाइन किया गया है, न कि राजस्व बढ़ाने वाले साधन के रूप में तैयार किया गया है।

उनका तर्क है कि कम इनपुट शुल्क से प्रतिस्पर्धा सुधर सकती है, इससे भारत का वैश्विक मूल्य श्रृंखला के साथ तालमेल होगा और आर्थिक गतिविधियां बढ़ने के कारण कर के आधार का विस्तार होगा। सरकार ने वित्त वर्ष 2027 में सीमा शुल्क संग्रह 5 प्रतिशत बढ़कर 2.7 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया है, जो वित्त वर्ष 2026 में 10 प्रतिशत बढ़ा था।

बहरहाल विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में वित्त वर्ष 2027 के लिए सीमा शुल्क राजस्व में 2.9 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान कम आकलन हो सकता है, क्योंकि भारत ने पिछले 5 साल में 9 व्यापार समझौते किए हैं, जिसमें 38 देश शामिल हैं। इनमें से कई समझौते चालू वित्त के दौरान लागू होंगे।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा कि भारत को अब एफटीए के माध्यम से वैश्विक व्यापार के लगभग 70 प्रतिशत तक तरजीही बाजार पहुंच प्राप्त है।

हाल में संपन्न व्यापार समझौतों में यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा), ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड, यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ एक अंतरिम व्यापार समझौता शामिल है। एफ्टा के साथ व्यापार समझौता अक्टूबर 2025 में लागू हुआ, वहीं सीमा शुल्क में हुई महत्त्वपूर्ण कटौती से जुड़े अन्य समझौते वित्त वर्ष 2027 में लागू होने की उम्मीद है।