राजकोट। रबी कालीन मसाला फसलों के अग्रणी उत्पादक राज्य- गुजरात में इस बार कम क्षेत्रफल में बिजाई होने तथा मौसम की हालत पूरी तरह अनुकूल नहीं रहने से उत्पादन में थोड़ी गिरावट आने की संभावना है।
ज्ञात हो कि रबी सीजन के दौरान मुख्यतः जीरा, धनिया एवं सौंफ जैसे मसालों का उत्पादन होता है जबकि हल्दी एवं लालमिर्च की खेती खरीफ सिजा में होती है। हल्दी एवं लालमिर्च का उत्पादन मुख्यतः आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक एवं महाराष्ट्र जैसे राज्यों में होता है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2024-25 सीजन की तुलना में 2025-26 सीजन के दौरान गुजरात में जीरा का उत्पादन क्षेत्र 4,76,537 हेक्टेयर से 68,338 हेक्टेयर लुढ़ककर 4,08,199 हेक्टेयर, धनिया का बिजाई क्षेत्र 1,30,731 हेक्टेयर से 4261 हेक्टेयर गिरकर 1,26,470 हेक्टेयर,
सौंफ का क्षेत्रफल 57,206 हेक्टेयर से 8261 हेक्टेयर घटकर 48,945 हेक्टेयर तथा ईसबगोल का रकबा 27,488 हेक्टेयर से फिसलकर 17,284 हेक्टेयर रह गया। ईसबगोल के रकबे में 10,204 हेक्टेयर की भारी गिरावट दर्ज की गई। यह आंकड़ा 2 फरवरी तक का है।
गुजरात के अलावा राजस्थान में भी उपरोक्त मसाला फसलों की अच्छी बिजाई होती है। आमतौर पर राजस्थान में मसाला फसलों का रकबा गुजरात से ज्यादा रहता है लेकिन वहां उपज दर नीचे रहने से उत्पादन गुजरात में अधिक होता है।
राजस्थान में भी जीरा के बिजाई क्षेत्र में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आने की सूचना मिल रही है। धनिया का उत्पादन गुजरात एवं राजस्थान के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी होता है।
घरेलू बाजार भाव ज्यादा आकर्षक नहीं होने के कारण किसानों द्वारा इस बार मसाला फसलों की खेती पर कम ध्यान दिया गया और इसके बजाए गेहूं, चना तथा सरसों जैसी फसलों का रकबा बढ़ाने का प्रयास किया गया।
अगैती बिजाई वाली मसाला फसलों की आवक आगामी सप्ताहों में जोर पड्कने की संभावना है। जीरा का निर्यात प्रदर्शन कमजोर चल रहा है और सौंफ के शिपमेंट में भी गिरावट आ रही है।

