इंदौर। ऊंचे दाम पर हवा का देकर पॉल्ट्री उद्योग केन्द्र सरकार से विदेशों से जी एम सोयामील के आयात की अनुमति देने की मांग कर रहा है। मगर सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) यह कहते हुए इसका विरोध कर रहा है
कि यह कोई स्थायी मुद्रा नहीं है क्योंकि सोयामील का घरेलू बाजार भाव मुख्यतः सोयाबीन तथा क्रूड सोया तेल के दाम में आने वाले उतार-चढ़ाव के साथ घटता-बढ़ता रहता है। एसोसिएशन ने अपनी बात को साबित करने के लिए आंकड़ों का सबूत भी दिया है।
एसोसिएशन के अनुसार 17 अप्रैल 2025 को जब इंदौर मार्केट में सोयाबीन का प्लांट डिलीवरी मूल्य 46,000 रुपए प्रति टन तथा इंदौर में क्रूड सोया तेल का एक्स फैक्टरी भाव 1,21,000 रुपए प्रति टन चल रहा था वहां सोयामील का दाम भी 32,715 रुपए प्रति टन दर्ज किया गया था
लेकिन 1 मई 2025 को जब सोयाबीन और सोया तेल का दाम कमजोर पड़ा तब सोयामील का भाव भी घटकर 30,732 रुपए प्रति टन पर आ गया।
इसके बाद 2 जून से 1 दिसम्बर 2025 तक सोयामील के मूल्य में सीमित उतार-चढ़ाव देखा गया 30-32 हजार रुपए प्रति टन के बीच घूमता रहा।
कुछ समय के लिए सोयामील का दाम 34,000-35,000 रुपए प्रति क्विंटल पर भी पहुंचा था लेकिन वहां यह टिक नहीं पाया और दोबारा नीचे आ गया।
इसके बाद 2 जनवरी 2026 को सोयाबीन का प्लांट डिलीवरी मूल्य बढ़कर 49,300 रुपए प्रति टन तथा क्रूड सोया तेल का दाम 1,20,500 रुपए प्रति टन पर पहुंचा तो सोयामील का भाव भी सुधरकर 36,845 रुपए प्रति टन हो गया।
इसी तरह 31 जनवरी 2026 को सोयाबीन का दाम उछलकर 56,900 रुपए प्रति टन तथा क्रूड सोया तेल का भाव बढ़कर 1,31,000 रुपए प्रति टन पर पहुंचने से सोयामील का मूल्य भी बढ़कर 43,872 रुपए प्रति टन हो गया जो वास्तविक ही था।
घरेलू प्रभाग में सोयामील का उत्पादन तमाम औद्योगिक मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त होता है और यदि विदेशों से सस्ते जीएम सोयामील का भारी आयात शुरू हुआ तो सोयाबीन उत्पादकों एवं क्रशर्स-प्रोसेसर्स को गहरा आघात लग सकता है।

