आईडीबीआई बैंक की बिक्री का प्रोसेस तीसरे चरण में, कर्मचारियों में हड़कंप

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नई दिल्ली। IDBI Bank Privatisation: आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश (Strategic Disinvestment) की प्रक्रिया अब तीसरे चरण में पहुंच गई है। विनिवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणिश चावला ने बताया कि अब इस प्रक्रिया के तहत तकनीकी और वित्तीय बोलियां आमंत्रित की जाएंगी।

बजट के बाद ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में अभी थोड़ा समय लगेगा, लेकिन मौजूदा वित्त वर्ष के खत्म होने से पहले सरकार इस पर और जानकारी साझा कर सकती है।

इससे यह साफ है कि सरकार आईडीबीआई बैंक के निजीकरण को आगे बढ़ाने के मूड में है। इधर, शेयर बाजार में कारोबार के दौरान बैंक के शेयर करीबन 1 पर्सेंट तक गिर गए थे और यह 97 रुपये पर ट्रेड कर रहा था।

चावला ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार अब सिर्फ विनिवेश नहीं, बल्कि सरकारी संस्थानों के पुनर्गठन पर भी ध्यान दे रही है। खासतौर पर नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) को रणनीतिक क्षेत्रों में मजबूत भूमिका देने की योजना है।

उन्होंने बताया कि पावर सेक्टर में पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (REC) को मिलाकर एक मजबूत केंद्रीय NBFC बनाने की कोशिश की जा रही है। यह संस्था राज्य बिजली कंपनियों, डिस्कॉम, ट्रांसमिशन और पावर जेनरेशन कंपनियों को फाइनेंस देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईडीबीआई अधिकारियों और कर्मचारियों के यूनाइटेड फोरम के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से मुलाकात का समय मांगा है, ताकि वे आईडीबीआई बैंक को निजी/विदेशी कंपनियों को बेचने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने का आग्रह कर सकें।

फोरम के संयोजक देविदास तुलजापुरकर तथा संयुक्त संयोजक रत्नाकर वानखेडे और विठ्ठल कोटेश्वर राव ने बताया कि राष्ट्रपति से बड़े राष्ट्रीय हित में हस्तक्षेप की मांग करते हुए एक ऑनलाइन याचिका भी दायर की गई है।

उन्होंने बताया कि इस मुद्दे से अवगत कराने और केंद्र सरकार को ‘देश और आम जनता के हित में’ इस प्रस्ताव से पीछे हटने के लिए समर्थन जुटाने हेतु सभी राजनीतिक दलों से अलग-अलग संपर्क किया जा रहा है।