Budget: कैंसर की 17 दवाएं सस्ती होंगी, 3 नए आयुर्वेदिक संस्थान खोलने का एलान

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नई दिल्ली। Health Budget 2026 : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना लगातार 9वां बजट पेश किया। इस बजट को विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक बताया है। देश के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाने के लिए कई अहम एलान किए गए हैं। आइए जानते हैं कि बजट 2026 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए क्या खास है।

कैंसर मरीजों के लिए राहत
बजट में कैंसर के इलाज को सस्ता बनाने पर जोर दिया गया है। 17 जरूरी कैंसर की दवाओं पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह हटा दिया गया है। इस फैसले से कैंसर मरीजों के लिए महंगी दवाएं सस्ती हो जाएंगी। इसके अलावा, 7 अन्य दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर भी इंपोर्ट ड्यूटी में छूट दी गई है।

मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा
देश में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पांच बड़े मेडिकल हब बनाए जाएंगे। इन हब को बनाने में निजी क्षेत्र की भी भागीदारी होगी। इन हेल्थकेयर कॉम्प्लेक्स में आयुष केंद्र, जांच केंद्र और इलाज के बाद की देखभाल के लिए सेंटर भी होंगे। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

बायोफार्मा शक्ति योजना की शुरुआत
भारत को दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग का दुनिया में नंबर-1 केंद्र बनाने का लक्ष्य है। इसे लेकर सरकार ने बायोफार्मा शक्ति योजना का एलान किया है। इस पर अगले 5 वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका मकसद कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों की जैविक दवाओं का देश में उत्पादन बढ़ाना है। सरकार भारत को इस क्षेत्र में एक ग्लोबल हब बनाना चाहती है। इसके लिए क्लिनिकल ट्रायल का नेटवर्क बनाया जाएगा और संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा।

2.5 लाख नौकरियों की सौगात
बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया है। अगले 5 वर्षों में 1 लाख सहायक स्वास्थ्य कर्मियों (AHP) को ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही, 1.5 लाख केयर गिवर्स भी तैयार किए जाएंगे, जो खासकर बुजुर्गों की देखभाल करेंगे। रेडियोलॉजी और एनेस्थीसिया जैसे विषयों की पढ़ाई कराने वाले संस्थानों को भी बेहतर बनाया जाएगा।

नए आयुर्वेद संस्थान की घोषणा
सरकार ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को भी बढ़ावा देने का फैसला किया है। देश में 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खोले जाएंगे। योग और आयुर्वेद को दुनिया भर में पहचान दिलाने के लिए काम किया जाएगा। जामनगर में स्थित WHO के ग्लोबल सेंटर को और मजबूत किया जाएगा, जिससे आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्यात भी बढ़ेगा।

मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
उत्तर भारत में एक नया राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (NIMHANS-2) खोला जाएगा। डिजिटल प्रोफेशनल्स और कंटेंट क्रिएटर्स की मानसिक सेहत पर भी खास ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, जिला अस्पतालों में इमरजेंसी और ट्रामा केयर की क्षमता 50% बढ़ाई जाएगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए की गई घोषणाएं

  • कैंसर रोगियों को राहत: कैंसर की 17 दवाएं सस्ती होंगी।
  • मानसिक स्वास्थ्य और अन्य सुधार: उत्तर भारत में NIMHANS-2। एक नया राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान। डिजिटल प्रोफेशनल्स और कंटेंट क्रिएटर्स की मानसिक सेहत पर ध्यान। रांची और तेजपुर की स्वास्थ्य संस्थाओं को अपग्रेड। जिला अस्पतालों में इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर की क्षमता 50% बढ़ाना। आर्टिफिशियल लिम्ब्स बनाने को सपोर्ट।
  • रोजगार और ट्रेनिंग: स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्किल-आधारित नौकरियोंको बढ़ावा दिया जाएगा।
  • नए प्रोफेशनल्स: अगले 5 वर्षो में 1 लाख एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स (AHP) और 1.5 लाख केयर गिवर्स को ट्रेनिंग दी जाएगी।
  • संस्थानों का अपग्रेड: रेडियोलॉजी और एनेस्थीशिया जैसे खास विषयों की पढ़ाई कराने वाले संस्थानों को बेहतर बनाया जाएगा।
  • रीजनल मेडिकल हब: देश में 5 क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाए जाएंगे, जिसमें प्राइवेट सेक्टर की भी भागीदारी होगी।
  • हेल्थकेयर कॉम्प्लेक्स: नए कॉम्प्लेक्स बनेंगे जहां एक ही छत के नीचे AYUSH केंद्र, डायग्नोस्टिक (जांच), और रीहैब (पुनर्वास) जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
  • नये संस्थान: देश में 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान खोले जाएंगे।
  • प्राचीन पद्धति: योग और आयुर्वेद को दुनियाभर में और अधिक पहचान दिलाने पर जोर दिया जाएगा।
  • बड़ा निवेश: ‘बायो-फार्मा शक्ति’ पहल के तहत अगले 5 वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
  • ग्लोबल हब: भारत को दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग का दुनिया में नंबर-1 केंद्र बनाने का लक्ष्य है।
  • रिसर्च नेटवर्क: देशभर में 10,000 नई क्लीनिकल ट्रायल साइट्स बनाई जाएंगी ताकि रिसर्च का काम तेजी से हो सके।
  • संस्थानों का विकास: बायो-फार्मा क्षेत्र में शोध के लिए 3 नए राष्ट्रीय संस्थान बनेंगे और 7 पुराने संस्थानों को मॉडर्न तकनीक से लैस किया जाएगा।