वारंगल। पिछले साल की तुलना में 2025-26 सीजन के दौरान लालमिर्च के घरेलू उत्पादन में काफी गिरावट आने की आशंका है क्योंकि एक तो इसकी बिजाई कम क्षेत्रफल में हुई और दूसरे, कुछ महत्वपूर्ण उत्पादक क्षेत्रों में थ्रिप्स कीट के आघात एवं बिल्ट के कारण फसल की औसत उपज दर तथा क्वालिटी प्रभावित होने की संभावना है।
घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में लालमिर्च की मांग मजबूत बनी हुई है जिससे इसके दाम में अच्छी तेजी आने के संकेत मिल रहे हैं। व्यापार विश्लेषकों के अनुसार वारंगल एवं खम्मम की कृषि उपज मंडी में लालमिर्च का भाव तेज हो गया है।
शीत गृहों (कोल्ड स्टोरेज) से माल की भारी निकासी हो रही है। दिसावरी व्यापारियों एवं निर्यातकों की मांग मजबूत बनी हुई है जबकि आपूर्ति अपेक्षाकृत कम हो रही है।
पिछले सप्ताह एक समय लालमिर्च का थोक मंडी भाव उछलकर 22,000 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया था जो गत तीन वर्ष का सबसे ऊंचा स्तर था।लेकिन इस शीर्ष स्तर पर दाम टिक नहीं सका और अब गिरकर 15000-18500 रुपए प्रति क्विंटल के बीच आ गया है। यह मूल्य भी काफी मजबूत माना जा रहा है।
उत्पादकों का कहना है कि ऊंचे में लालमिर्च का मूल्य 18,500 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है जो किसानों के लिए संतोषजनक स्तर है। तेलंगाना में पांच साल पूर्व लालमिर्च का बिजाई क्षेत्र बढ़कर करीब 1.25 लाख एकड़ पर पहुंच गया था जो 2025 में घटकर 30 हजार एकड़ रह गया।
घटती कीमतों के कारण इस महत्वपूर्ण मसाला फसल की खेती में तेलंगाना के किसानों का उत्साह एवं आकर्षण कम हो गया। विशेषज्ञों के अनुसार अगली नई फसल की क्वालिटी के प्रति चिंता बनी हुई है।
आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में अगैती बिजाई वाली फसल की नई आवक प्रभावित हो रही है। अत्यधिक नमी एवं बारिश से फसल क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिल रही है। इसके फलस्वरूप पुराने स्टॉक की मांग मजबूत देखी जा रही है।

