कोटा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 60 छात्रों को स्वर्ण पदक, 81 को पीएचडी
कोटा। शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए राजस्थान के राज्यपाल एवं कोटा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि वही शिक्षा सार्थक है, जो रटंत प्रणाली से ऊपर उठकर विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता, विवेक और सृजनशीलता का विकास करे। वे शुक्रवार को सीआईएएम ऑडिटोरियम में आयोजित कोटा विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल ने स्वर्ण पदक एवं उपाधि प्राप्त करने वाले दीक्षार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय प्रतिभा की विश्वभर में सराहना हो रही है। आज प्राप्त उपाधियां केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का प्रतीक हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग देश को सशक्त बनाने में करें।
उन्होंने कहा कि जिस समाज में शिक्षा का विस्तार होता है, वही समाज प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है। यह गौरव का विषय है कि यह दीक्षांत समारोह बसंत पंचमी, विद्या की देवी मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस पर आयोजित हुआ। यह पर्व जीवन में नवचेतना, सृजनात्मक ऊर्जा और सकारात्मक दृष्टिकोण का संचार करता है।
शिक्षा का लक्ष्य व्यक्तित्व निर्माण
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है। विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ जीवन मूल्यों, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी की शिक्षा भी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति–2020 इसी सोच पर आधारित है, जिसमें कौशल, नवाचार, शोध और चरित्र निर्माण को समान महत्व दिया गया है।
उन्होंने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों से आग्रह किया कि वे स्वयं को निरंतर अद्यतन रखें, वैश्विक परिवर्तनों को समझें और विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान से लाभान्वित करें। शिक्षण प्रक्रिया में संवाद, फीडबैक प्रणाली और शोध को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और नवाचार की भावना विकसित होती है।
नेताजी को नमन
राज्यपाल ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 130वीं जयंती पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि नेताजी का जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग और आत्मबल का प्रतीक है। उनके विचार आज भी युवाओं को प्रेरणा देते हैं।
रोजगार सृजन की अपील
समारोह के मुख्य अतिथि ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि दीक्षांत केवल प्रमाण-पत्र प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज के प्रति नई जिम्मेदारी स्वीकार करने का क्षण है। उन्होंने युवाओं से नौकरी मांगने के बजाय रोजगार देने वाला बनने का आह्वान किया तथा स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्र प्रथम की भावना से कार्य करते हुए युवा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं
उन्होंने भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय विश्वभर में ज्ञान के केंद्र रहे हैं। उन्होंने सभी कुलगुरुओं से विश्वविद्यालयों को आधुनिक गुरुकुल के रूप में विकसित करने का आग्रह किया।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति–2020 को पूर्ण रूप से लागू किया जा चुका है। वर्तमान में 44 पाठ्यक्रम संचालित हैं तथा 239 संबद्ध महाविद्यालयों में 2.70 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
उन्होंने बताया कि डिजिटल पुस्तकालय, स्वचालित पुस्तक वितरण प्रणाली और ई-जर्नल्स की उपलब्धता से शिक्षण व्यवस्था को आधुनिक बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध और नवाचार के माध्यम से सुसंस्कृत समाज एवं सुदृढ़ राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
शिक्षा से राष्ट्र निर्माण : प्रो. शर्मा
दीक्षांत अतिथि प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, नैतिकता और राष्ट्रभक्ति के संस्कारों का माध्यम है। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति का भविष्य करोड़ों विद्यार्थियों की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। भारत आज युवा शक्ति के बल पर वैश्विक अर्थव्यवस्था में सशक्त भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने “मेड बाय इंडिया” अभियान को प्रोत्साहित करने तथा तकनीकी राष्ट्रवाद की भावना को अपनाने का आह्वान किया। दीक्षांत समारोह में 80,117 उपाधियों का वितरण किया गया। वर्ष 2023 में कला संकाय की पीजी विद्यार्थी वैशाली अग्रवाल को कुलाधिपति पदक तथा वाणिज्य संकाय के यूजी विद्यार्थी दीपांश को कुलपति पदक प्रदान किया गया।
विभिन्न संकायों में मेरिट में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले 60 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। संकायवार उपाधियों में कला संकाय से 51 हजार 23, शिक्षा से 11 हजार 444, समाज विज्ञान से 7 हजार 324, विज्ञान से 6 हजार 906, वाणिज्य से 3 हजार 313 एवं विधि संकाय से 107 विद्यार्थियों को उपाधियां दी गई। इनमें 41 हजार 644 छात्राएं एवं 38 हजार 473 छात्र थे।
81 शोधार्थियों को पीएचडी
वर्ष 2023 के लिए कुल 81 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। इनमें 44 छात्र एवं 37 छात्राएं सम्मिलित हैं। संकायवार पीएचडी वितरण में विज्ञान संकाय में 28, कला में 24, समाज विज्ञान में 21, वाणिज्य में 6, विधि एवं शिक्षा संकाय में एक-एक शोधार्थी को पीएचडी की उपाधि दी गई।



