भारत से बचाने के लिए पाकिस्तान अमेरिका के आगे सैकड़ों बार गिड़गिड़ाया था: रिपोर्ट

0
9

वॉशिंगटन। प्रोपेगेंडा के बादल कुछ समय तक रह सकते हैं, फिर सच्चाई का सूरज खिल उठता है। पाकिस्तानियों ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर 2025 में साल भर झूठ बोला, लेकिन 2026 की शुरूआत के पहले हफ्ते ही पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा और डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता पर दावों का पर्दाफाश हो गया।

अमेरिका में जारी नये दस्तावेजों से पता चलता है कि पाकिस्तान ने पहलगाम आतंकी हमला होने के बाद ट्रंप प्रशासन से कम से कम 100 बार भारतीय हमलों से बचाने की गुहार लगाई थी। इतना ही नहीं, 10 मई को सीजफायर की घोषणा के बाद जब भारत ने कहा था कि ये सीजफायर अस्थाई है और ऑपरेशन सिंदूर जारी है, उस पर भी पाकिस्तान घबराया हुआ था और अमेरिका में अपने ‘मालिकों’ से भारत से बचाने की गुजारिश कर रहा था।

अमेरिकी फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत जो दस्तावेज जारी किए गये हैं, ये बातें उसी में दर्ज हैं। इन दस्तावेजों से पता चलता है कि शहबाज शरीफ और असीम मुनीर ने मदद के बदले, अमेरिका में ज्यादा इन्वेस्टमेंट, स्पेशल एक्सेस और क्रिटिकल मिनरल्स देने की पेशकश की थी, जिसकी चर्चा बाद में डोनाल्ड ट्रंप ने बार बार सार्वजनिक मंचों से की है।

अमेरिका में लॉ फर्म स्क्वॉयर पैटन बोग्स ने FARA के तहस अपने दस्तावेज अपलोड किए हैं, जिनसे नये खुलासे हुए हैं। इन दस्तावेजों में शामिल एक लॉग लिस्ट से पता चलता है कि पाकिस्तानी डिप्लोमैट्स और डिफेंस अधिकारियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईमेल और फोन कॉल के जरिए अपने अमेरिकी समकक्षों से 100 से ज्यादा बार संपर्क किया था।

इस दौरान अमेरिकी अधिकारियों, बिचौलियों और यहां तक कि अमेरिकी मीडिया के साथ आमने-सामने की बैठक करवाने का अनुरोध किया था। FARA फाइलिंग से पता चलता है कि पाकिस्तान ने मई 2025 के संघर्ष के दौरान वाशिंगटन में अलग-अलग लॉबी फर्मों के ज़रिए अमेरिकी सरकार के कई हिस्सों से संपर्क किया। ऐसा 100 बार से ज्यादा हुआ।

इन दस्तावेजों से पता चलता है कि पाकिस्तान ने अमेरिका से ऑपरेशन सिंदूर को खत्म करवाने के लिए भारत से बातचीत की गुहार लगाई थी। इसके अलावा पाकिस्तान ने भारत से बातचीत करवाने में मध्यस्थता करवाने में मदद करने की कोशिश का ‘स्वागत’ किया था। यानि, वो पाकिस्तान था, जो अमेरिका से मध्यस्थता की गुहार लगा रहा था, भारत नहीं। इसलिए डोनाल्ड ट्रंप का मध्यस्थता का दावा फुस्स हो गया है।

दस्तावेज में लिखा हुआ है कि “पाकिस्तान 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमले की स्वतंत्र, निष्पक्ष जांच की मांग करता है। इसमें अमेरिका की मदद का स्वागत किया जाएगा। पाकिस्तान, सिंधु जल संधि, आतंकवाद विरोधी दोनों देशों को बांटने वाले सभी मुद्दों पर भारत के साथ बातचीत चाहता है।” इसमें आगे कहा गया है कि “मजबूत क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी सहयोग में अमेरिका को शामिल किया जाना चाहिए।

पाकिस्तान का मानना है कि कोई तीसरा पक्ष दोनों देशों को भरोसेमंद समझौतों पर पहुंचने में मदद कर सकता है।” इन दस्तावेजों में आगे कहा गया है कि “पाकिस्तान को पाकिस्तानी तालिबान से भी आतंकवादी खतरों का सामना करना पड़ता है। 2025 की अमेरिकी DNI वार्षिक खतरा मूल्यांकन रिपोर्ट में पाकिस्तानी तालिबान को संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए एक संभावित खतरा बताया गया है।”