कोटा। बीते वर्ष की विदाई और नववर्ष के स्वागत के अवसर पर महावीर नगर विस्तार योजना स्थित जैन मंदिर में विश्व शांति विधान का आयोजन श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ।
अध्यक्ष पवन ठौरा ने बताया कि यह आयोजन गणिनी आर्यिका विशुद्ध मति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में हुआ। इस अवसर पर पूज्य गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने सभी श्रद्धालुओं को नववर्ष पर मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में शुद्ध सम्यग्दर्शन को अवश्य धारण करना चाहिए।
क्योंकि मोक्ष महल की प्रथम सीढ़ी सम्यग्दर्शन ही है। उन्होंने कहा कि यह निश्चित नहीं होता कि कब बोया गया बीज कब फलित होगा, लेकिन जो भावना भावित की जाती है और जो प्रार्थना की जाती है, वही भावना भविष्य में अवश्य फल देती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को निरंतर शुभ और सद्कर्मों के लिए पवित्र भावना बनाए रखनी चाहिए।
प्रवचनों में स्पष्ट किया कि जैन धर्म किसी जाति विशेष तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि अधर्म के प्रभाव से देव भी अधोगति को प्राप्त कर सकता है, जबकि धर्म के प्रभाव से सामान्य प्राणी भी उच्च पद को प्राप्त कर लेता है। धर्म के प्रभाव से साधारण व्यक्ति राजा बन सकता है और अधर्म के प्रभाव से राजा भी पतन की ओर चला जाता है।

