सकल दिगम्बर समाज का क्षमावाणी पर्व:तपस्वियों और प्रतिभाओं को किया सम्मानित
कोटा। सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में रविवार को आरोग्य नगर स्थित जैन जनउपयोगी भवन में सामूहिक क्षमावाणी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में समाजबंधुओं ने भाग लिया।
आचार्य प्रज्ञासागर महाराज ससंघ तथा गणिनी आर्यिका रत्न विभाश्री माताजी सहित 13 पिच्छी का सान्निध्य रहा। समारोह में दीप प्रज्ज्वलन, मंगलाचरण, संत प्रवचन, पूजन-अभिषेक एवं सामूहिक क्षमावाणी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लगभग छह हजार से अधिक समाजबंधुओं ने करबद्ध होकर एक-दूसरे से क्षमा याचना की।
कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, विधायक संदीप शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जैन तथा अति.पुलिस अधिक्षक प्रवीण जैन सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
क्षमा करना आत्मबल का परिचायक
प्रज्ञासागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि क्षमावीरस्य भूषणम अर्थात क्षमा वीर को ही शोभा देती है। उन्होंने कहा कि क्षमा करना कमजोरी का नहीं, बल्कि सामर्थ्य और आत्मबल का परिचायक है। जिस प्रकार आभूषण शरीर की शोभा बढ़ाते हैं, उसी प्रकार क्षमा वीर के चरित्र को और अधिक महान बनाती है।
गुरुदेव ने कहा कि उत्तम क्षमा दसलक्षण धर्म का सबसे बड़ा तत्व है। जो व्यक्ति क्षमा का भाव रखता है, उसमें छल, कपट, मान, अभिमान और अहंकार जैसे अवगुण प्रवेश नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि क्षमा अद्भुत सूत्र है और आज विश्व को इसकी सर्वाधिक आवश्यकता है। यदि यूक्रेन रूस को और ईरान इज़राइल को उत्तम क्षमा कह दें, तो समस्त कलह समाप्त हो सकते हैं। क्षमा मन को हल्का करती है और तनाव को दूर करती है। उन्होंने कहा कि क्षमा माँगने की शुरुआत सबसे पहले घर, परिवार और पड़ोस से करनी चाहिए। उसके बाद समाज और दूर के रिश्तों में क्षमायाचना का विस्तार करना चाहिए।
विश्व मैत्री दिवस के रूप में मनाएं
आर्यिका विभाश्री माताजी ने प्रवचन में कहा कि अनेक राज्यों में दसलक्षण पर्व देखे हैं, किंतु कोटा ही ऐसा नगर है जहाँ हजारों की संख्या में लोग एकत्र होकर सामूहिक क्षमावाणी मनाते हैं। उन्होंने कहा कि क्षमा माँगना कठिन कार्य है। क्योंकि इसके लिए मन के कषायों को दूर करना पड़ता है। जैन समाज से प्रेरणा लेकर इसे विश्व मैत्री दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। यह पर्व मैत्री भाव जगाने और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाला है। इससे पूर्व आर के पुरम मंदिर समिति द्वारा मंगलाचरण किया गया। अंत में भगवान श्री जी की शांतिधारा व अभिषेक किया।
क्षमा का गुण जैन धर्म की विशेषता
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि क्षमा का गुण जैन धर्म की विशेषता है, जिससे सभी धर्मों को सीख लेनी चाहिए। विधायक संदीप शर्मा ने जैन सिद्धांतों को मानव मात्र के लिए उपयोगी बताया। राकेश जैन मडिया ने कहा कि सच्ची क्षमावाणी तभी संभव है जब दिल से क्षमा का भाव उत्पन्न हो।
इन मंदिरो को किया सम्मानित
कार्याध्यक्ष मनोज आदिनाथ एवं युवा प्रकोष्ठ के विजय दुगेरिया ने बताया कि दशलक्षण पर्व के दौरान मंदिरों की सजावट, मांडना और झांकियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए। जिसमें मंदिर सजावट प्रतियोगिता में प्रथम स्थान श्री चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर रिद्धी-सिद्धी,द्वितीय मुनिसुव्रत नाथ दि.जैन मंदिर आरकेपुरम सहित 5 दिगम्बर मंदिर, वहीं मांडना प्रतियोगिता में प्रथम स्थान तलवण्डी व द्वितीय विज्ञान नगर मंदिर सहित 5 मंदिर तथा सुगंध दशमी पर झांकी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान दिगम्बर .जैन मंदिर पार्श्वनाथ निलय व द्वितीय जवाहर नगर को सहित 7 मंदिरो को पुरस्कृत किया गया।
मांगी उत्तम क्षमा, किया पुरस्कृत
प्रचार मंत्री पारस जैन एवं शेलेन्द्र जैन ने बताया कि क्षमावाणी के पर्व पर सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा आयोजित सामूहिक क्षमावाणी पर्व पर लोगो ने करबद्ध होकर एक दूसरे के सम्मुख सिर झुकाकर उत्तम क्षमा मांगी और जाने अनजाने हुई गलतियों की क्षमा मांगी। इस अवसर समाज की ओर दशलक्षण धर्म पर्व में 16 दिन तक उपवास वालें 04 तथा 10 दिनों तक उपवास करने वाले 64 पुरुष व महिलाओं को माला,शॉल व प्रशस्ति पत्र भेंट किया। इस मौके पर समाज की प्रतिभाओं को भी पुरस्कृत किया गया। इस वर्ष आईआईटी, एमबीबीएस व सी ए की डिग्री प्राप्त करने वाले,खेल की दुनिया में शैक्षणिक प्रतिभाओं तथा विभिन्न मंदिर समितियों के पदाधिकारियों व कार्यक्रम सहयोगियों को मंच पर सम्मानित किया गया।

