रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी- रायपुर में छोटी (हरी) इलायची के बाजार को कुछ बड़े-बड़े सटोरिये अपनी उंगलियों पर नचा रहे हैं जिससे छोटे-छोटे कारोबारियों की जान संकट में फसने की आशंका है।
दरअसल इन सटोरियों का अपना एक सिंडिकेट है और वह सुनियोजित ढंग से बाजार को ऊपर नीचे कर रहा है। रायपुर में छोटी इलायची के कारोबार में सट्टेबाजी का इतना जबरदस्त दौर चल रहा है कि सामान्य कारोबारियों को अपनी रणनीति बनाने का अवसर ही नहीं मिल रहा है।
रायपुर में एक विशेष ब्रांड की इलायची के दाम में नीलामी केन्द्रों से भी ज्यादा तेज गति से बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। किसी भी जिंस के बाजार में तेजी-मंदी आना असामान्य घटना नहीं है और प्रत्येक व्यापारी को कारोबार करने का अधिकार भी है। मगर जब बाजार पर सट्टेबाजी का वर्चस्व हो जाए और कीमतों में अप्रत्याशित तेजी-मंदी का माहौल बन जाए तब खासकर छोटे कारोबारियों पर संकट स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।
जानकार सूत्रों के अनुसार पिछले एक माह के दौरान उत्पादक क्षेत्रों के नीलामी केन्द्रों में हरी इलायची के दाम में महज 100-200 रुपए प्रति किलो की वृद्धि हुई है जबकि रायपुर में विशेष ब्रांड की छोटी इलायची का भाव 1200-1300 रुपए प्रति किलो से उछलकर 1800 रुपए प्रति किलो के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया है।
इससे छोटे कारोबारी न केवल हैरान बल्कि चिंतित भी हैं। उन्हें बाजार की यह जोरदार तेजी स्वाभाविक नहीं बल्कि कृत्रिम या आभासी (बनावटी) प्रतीत होती है। छोटे व्यापारियों को यह आशंका भी है कि बड़े-बड़े सट्टेबाजों का सिंडिकेट कुछ ही समय के बाद हरी इलायची का भाव तेजी से घटा सकते हैं।
ऐसी स्थिति में वर्तमान में ऊंचे भाव पर जिस माल की खरीद की जाएगी उसे आगे घाटा उठाकर बेचने के लिए विवश होना पड़ सकता है। कुछ माह पूर्व मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी इस तरह की घटना सामने आई थी। आगामी समय में अगर इलायची का दाम घटकर पुनः 1200-1300 रुपए प्रति किलो पर आ गया तो छोटे व्यापारियों को लाखों रुपए का नुकसान हो जाएगा।
व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह का कृत्रिम उतार-चढ़ाव बाजार की पारदर्शिता एवं स्थिरता को प्रभावित करते हैं और छोटे व्यापारियों के लिए गंभीर संकट उत्पन्न करते हैं इसलिए प्रशासन एवं जिंस मंडी से सम्बन्धित संघों-संगठनों को तत्काल इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए।

