उत्पादक राज्यों की मंडियों में नई फसल की जोरदार आवक से गेहूं का भाव नरम

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नई दिल्ली। सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में विशाल मात्रा में नए गेहूं की आपूर्ति शुरू होने से कीमतों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इस बार उत्पादन भी बेहतर होने के संकेत मिल रहे हैं।

थोक मंडियों में मिलिंग क्वालिटी के गेहूं का दाम नरम पड़ गया है। व्यापार विश्लेषकों के अनुसार जिन मंडियों में एक माह पूर्व गेहूं का दाम 3200/3400 रुपए प्रति क्विंटल की ऊंचाई पर चल रहा था वहां अब यह घटकर 2450/2600 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि जब तक आपूर्ति का पीक सीजन जारी रहेगा तब तक गेहूं का मंडी भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास ही घूमता रह सकता है

जो इस बार 2425 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है। अगले एक-दो सप्ताहों में गेहूं की आवक और भी तेजी से हो सकती है।

पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान जैसे प्रांतों में गेहूं फसल की जोरदार कटाई-तैयारी हो रही है। 16 अप्रैल तक मंडियों में एवं सरकारी क्रय केन्द्रों पर 134.80 लाख टन गेहूं की आवक दर्ज की गई जो गत वर्ष की समान अवधि की आवक 65.90 लाख टन से लगभग दोगुना है।

सरकार का मानना है कि गेहूं की भरपूर आवक एवं कीमतों में गिरावट से खाद्य महंगाई को घटाने में सहायता मिलेगी। इसके अलावा सरकारी स्टॉक का स्तर भी ऊंचा हो जाएगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि पिछले मार्केटिंग सीजन में 266.05 लाख टन गेहूं खरीदा गया था जो इस बार बढ़कर 280-290 लाख टन तक आसानी से पहुंच जाएगा। इस बार 312.70 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा गया है और विशाल आवक को देखते हुए इस लक्ष्य की प्राप्ति भी मुश्किल नहीं है।

इधर रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष नवनीत चितलांगिया का कहना है कि चालू वर्ष के दौरान गेहूं के घरेलू उत्पादन में बढ़ोत्तरी होने का अनुमान है और मंडियों में आने वाले गेहूं की क्वालिटी भी काफी अच्छी देखी जा रही है।

उद्योग- व्यापार क्षेत्र ने इस बार गेहूं का घरेलू उत्पादन बढ़कर 1100 लाख टन के करीब पहुंच जाने का अनुमान लगाया है जो केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के रिकॉर्ड अनुमान 1153 लाख टन से काफी कम है।