पारंपरिक खेल महोत्सव में बचपन की यादें हुई ताजा, विजेताओं का किया सम्मान

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कोटा। गुरु आस्था परिवार एवं सकल दिगंबर जैन समाज समिति कोटा के संयुक्त तत्वावधान में पारंपरिक खेल महोत्सव का भव्य आयोजन रविवार को तपोभूमि प्रणेता आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज (ससंघ) के पावन सानिध्य में मधुबन वाटिका में संपन्न हुआ। इस आयोजन ने समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर लाकर बचपन की यादों को ताजा करने का अवसर प्रदान किया।

यतिश जैन खेडावाला ने कहा कि आज के तकनीकी युग में पारंपरिक खेल कहीं खोते जा रहे हैं। इस महोत्सव का उद्देश्य उन खेलों को पुनर्जीवित करना था जो कभी बचपन का अभिन्न हिस्सा थे। आयोजन में नींबू दौड़, जलेबी दौड़, बोरा दौड़, कुर्सी दौड़, सतोलीया, गुल्ली-डंडा, रस्साकसी, कंचे, रस्सी कूद, खो-खो, कैरम बोर्ड जैसे खेल शामिल किए गए। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इन खेलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बचपन की यादों को जीवंत किया।

विमल जैन नांता ने बताया ​कि प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण समारोह में डॉ. पंकज जैन, डॉ. सुनील जैन, डॉ. दीप्ति जैन, सुनील जैन (उज्जैन), अनिल जैन, सुरेश कुमार, मनीष कुमार, मोहन, यतीश खेड़ा वाला, कपिल आगम समेत अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।

इस अवसर पर परम पूज्य आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि”खेल को सदैव खेल की भावना से खेलना चाहिए। हार-जीत जीवन का हिस्सा है, लेकिन असली जीत सहयोग, प्रेम और मैत्री में निहित होती है। खेल हमें अनुशासन, आत्म-निर्भरता और परिश्रम की सीख देते हैं, जो हमारे संपूर्ण जीवन के लिए आवश्यक है।”उनके इस प्रेरणादायक संदेश ने सभी को खेलों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा दी।

समाज में बढ़ता आपसी प्रेम और सद्भाव
यह आयोजन मनोरंजन और पारंपरिक खेलों को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और संस्कृति को मजबूत करने में भी सहायक सिद्ध हुआ। इस अवसर पर विमल जैन, वर्धमान यतीश जैन (खेड़ा वाला), लोकेश जैन (सीसवाली), अर्पित जैन, अजय खटकीड़ा, अजय मेरु, मनोज जैसवाल, दीपक नांता, अनिल जैन, नवीन दौराया, पारस जैन, मनोज जैन (मालू जी वाला) सहित अन्य विशिष्ट जन उपस्थित रहे।