26 साल बाद खत्म हुआ कर्ज का बोझ, कोटा भूमि विकास बैंक ने दी 23 लाख की राहत

0
8

कोटा। किसानों को ऋण के बोझ से मुक्ति दिलाने के लिए शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री अवधिपार ब्याज राहत एकमुश्त समझौता योजना 2025-26 के तहत कोटा सहकारी भूमि विकास बैंक ने एक सराहनीय पहल की है। बैंक ने 80 वर्षीय किसान औंकार लाल कीर को 26 साल पुराने कर्ज से मुक्ति दिलाते हुए 23.14 लाख रुपये की भारी राहत दी है।

सांगोद शाखा से जुड़े इस मामले में, किसान का 28.77 लाख रूपये का एनपीए खाता निस्तारित कर दिया गया, जिससे उनकी 60 बीघा से अधिक भूमि रहनमुक्त हो गई है।
बैंक अध्यक्ष चैन सिंह राठौड़ ने किसान औंकार लाल को नोड्यूज प्रमाणपत्र सौंपा। इस मौके पर किसान ने राहत की सांस लेते हुए बैंक और सरकार का आभार व्यक्त किया।

बैंक अध्यक्ष चैन सिंह राठौड़ ने कहा, यह योजना किसान हित के लिए प्रतिबद्ध राजस्थान सरकार का एक अमूल्य उपहार है। हमारे लिए यह गर्व की बात है कि यह योजना लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों से लागू की गई है।

उन्होंने कहा, पहले योजना का लाभ उठाने की अंतिम तिथि 30 जून थी, लेकिन किसानों की समस्याओं को देखते हुए राजस्थान की संवेदनशील सरकार ने इसे 30 सितंबर 2025 तक बढ़ा दिया है। मैं सभी पात्र किसानों से अपील करता हूँ कि वे इस अभूतपूर्व और महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उठाएं, अपनी सिबिल सुधारें और राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दें।”

राठौड़ ने बताया कि कोटा भूमि विकास बैंक कोटा संभाग में पहले स्थान पर चल रहा है, और उन्होंने अधिकारियों को इसे राज्य स्तर पर भी प्रथम स्थान पर लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि योजना के तहत ऋण चुकाने वाले किसानों को 550 गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना में ऋण और समय पर चुकारा करने पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान योजना का भी प्राथमिकता से लाभ मिलेगा।

बकायादारों के लिए आख़री मौका
बैंक सचिव ऋतु सपरा ने बताया कि योजना के तहत 1059 अवधिपार ऋण खाते चिह्नित किए गए थे, जिन पर 38 करोड़ रूपये बकाया थे। अब तक 293 किसानों ने 2.38 करोड़ रुपये जमा कराए हैं, जिन्हें 4.19 करोड़ रुपये की राहत मिली है। उन्होंने शेष 766 किसानों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वे 30 सितंबर तक बकाया राशि जमा नहीं कराते हैं, तो उनकी रहनशुदा भूमि का नामांतरण बैंक के पक्ष में कर दिया जाएगा। इसके अलावा, उन्हें सहकारी संस्थाओं की योजनाओं से भी वंचित कर दिया जाएगा।