नई दिल्ली। बजट पेश करने की 2017 से शुरू हुई नई परंपरा इस वर्ष भी जारी रहने की संभावना है और रविवार होने के बावजूद 2026-27 का केंद्रीय बजट आगामी 1 फरवरी को आ सकता है। केंद्र सरकार के सूत्रों ने बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद बताया कि बजट की तारीख नहीं बदली गई है।
राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीपीए) ने प्रस्ताव दिया है कि बजट पेश करने की निर्धारित तिथि 1 फरवरी ही रखी जाए, भले ही इस वर्ष उस दिन रविवार है। यही नहीं, उसी दिन गुरु रविदास जयंती भी है। 15वीं शताब्दी के संत और समाज सुधारक गुरु रविदास की स्मृति में इस मौके पर कुछ राज्यों में सरकारी अवकाश रहता है।
संसद का बजट सत्र बुधवार 28 जनवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ शुरू होने की संभावना है और आर्थिक समीक्षा 2025-26 को अगले दिन गुरुवार 29 जनवरी को पेश की जा सकती है। इसके बाद 30 जनवरी को संसद की छुट्टी रहेगी, क्योंकि बजट प्रस्तुति के लिए रविवार, 1 फरवरी को संसद की कार्यवाही चल सकती है। शनिवार को भी हमेशा की तरह निचले सदन में कामकाज नहीं होगा।
बजट सत्र का पहला भाग 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलने की संभावना है। इसके बाद 9 मार्च को सत्र दोबारा शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। लेकिन अभी इस बारे में पुख्ता जानकारी नहीं आई है, क्योंकि संसदीय कार्य मंत्रालय अभी तक संसद के बजट सत्र की तारीखों की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
देश में केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश करने की परंपरा 2017 में शुरू हुई थी। उसके बाद से इसका पालन हो रहा है और इस अवधि में कभी भी उस दिन रविवार नहीं पड़ा। हां, वर्ष 2020 और 2025 में 1 फरवरी शनिवार को आई, लेकिन आमतौर पर साप्ताहिक अवकाश होने के बावजूद इन दोनों ही वर्षों में उस दिन संसद का सत्र चला और बजट पेश किया गया।
गुरु रविदास जयंती केंद्र सरकार का सार्वजनिक अवकाश नहीं है, यह वैकल्पिक है। इस दिन दिल्ली और हरियाणा समेत उत्तर भारत के कुछ ही इलाकों में गुरु रविदास जयंती पर छुट्टी रहती है। वर्ष 2025 में रविदास जयंती 12 फरवरी को बुधवार के दिन संसद के बजट सत्र के बीच में पड़ी थी और इस कारण दोनों सदनों की बैठकें नहीं हुई थीं।
विशेष परिस्थितियों में कई बार संसद की कार्यवाही रविवार को चली है। जैसे 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान और 13 मई 2012 को संसद की पहली बैठक की 60वीं वर्षगांठ मनाने के लिए रविवार को संसद चली थी। इसी प्रकार ऐसे उदाहरण भी हैं जब दोनों सदनों की बैठकें सार्वजनिक अवकाश के दिन भी हुई हैं।
उदाहरण के तौर पर 1957 में 13 मई को बुद्ध पूर्णिमा थी। इस कारण देश में सार्वजनिक अवकाश था। इसके बावजूद राष्ट्रपति ने दोनों सदनों को संबोधित किया और उस दिन दोनों सदनों की अलग-अलग बैठकें हुईं। राज्य सभा की वेबसाइट के अनुसार, ‘संसद सत्र की बैठकें निर्धारित करने में केंद्र सरकार के कार्यालयों में वैकल्पिक अवकाशों को ध्यान में नहीं रखा जाता है। उस दिन सत्र चल सकता है।’
वर्ष 2017 से पहले केंद्रीय बजट फरवरी के अंतिम कार्य दिवस पर पेश किया जाता था। तब यह परंपरा थी कि यदि 28 या 29 फरवरी को रविवार पड़ जाता, तो बजट एक दिन पहले यानी शनिवार को पेश किया जाता था। नई परंपरा में 1 फरवरी की तारीख यह सुनिश्चित करने के लिए तय की गई थी कि 1 अप्रैल को नए वित्त वर्ष की शुरुआत से ही बजट का कार्यान्वयन हो जाए।

