जयपुर। अब पूरे देश को विभिन्न एग्रो–क्लाइमेटिक जोनों में बाँटकर हर राज्य के लिए अलग कृषि रोडमैप बनाया जाएगा। सभी किसानों को फार्मर आईडी से जोड़कर खाद, बीज, फसल बीमा और मुआवजा वितरण की पूरी प्रणाली को पारदर्शी और लक्षित किया जाएगा।
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–तिलहन के अंतर्गत 2024–25 में 429.89 लाख टन के रिकॉर्ड उत्पादन और उत्पादकता में हुई बढ़ोतरी को और आगे बढ़ाते हुए तिलहन का क्षेत्र 29 मिलियन हेक्टेयर से 33 मिलियन हेक्टेयर और उत्पादन 39.2 मिलियन टन से 69.7 मिलियन टन तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है।
जबकि दलहन मिशन के तहत बीज उत्पादन, दाल मिलों की स्थापना, नई बीज किस्मों को सीड चेन में लाने तथा इच्छुक किसानों से 100 प्रतिशत खरीद के माध्यम से देश को दालों में भी मजबूत आत्मनिर्भरता की ओर ले जाया जाएगा। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को जयपुर में आयोजित रीजनल कृषि कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि यह देश की पहली रीजनल कॉन्फ्रेंस है, जिसमें ICAR के वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान, FPOs, नेफेड, NCCF और बीज से लेकर बाजार तक काम करने वाली सभी संस्थाएँ एक मंच पर आई हैं जबकि पहले खरीफ और रबी के लिए केवल राष्ट्रीय स्तर पर एक कॉन्फ्रेंस होती थी जिसमें समय की कमी के चलते विस्तार से चर्चा नहीं हो पाती थी।
उन्होंने कहा कि अब देश को पाँच एग्रो–क्लाइमेटिक जोनों में बाँटकर पाँच रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएँगी, जिनमें हर राज्य की जलवायु, मिट्टी, पानी और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अलग कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा और उसी के अनुसार यह तय होगा कि किस इलाके में कौन–सी फसल, कौन–सी किस्म और कौन–सी कृषि पद्धति सर्वोत्तम होगी।
फार्मर आईडी
केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि सभी राज्यों में फार्मर आईडी बनाने का काम तेज गति से चल रहा है और विश्वास जताया कि लगभग तीन महीने में सभी किसानों की एकीकृत पहचान तैयार हो जाएगी, जिससे किसान को हर योजना का लाभ सीधे और सटीक रूप से मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में फार्मर आईडी के आधार पर खाद वितरण का जो मॉडल लागू है, उसी तर्ज पर पूरे देश में व्यवस्था की जाएगी, जिसमें किसान को लाइन में नहीं लगना पड़ेगा, उसकी जमीन और फसल के अनुसार आवश्यक मात्रा में खाद मिलेगा, नकली या ब्लैक मार्केटिंग रोकी जा सकेगी और टेनेंट/बटाईदार किसानों को भी मालिक की स्वीकृति के आधार पर फार्मर आईडी से खाद व अन्य सुविधाएँ मिलेंगी; यही आईडी आगे फसल बीमा, फसल–क्षति मुआवजा और अन्य लाभों का भी आधार बनेगी।
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन
उन्होने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–तिलहन के अंतर्गत 2024–25 में तिलहन का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर 429.89 लाख टन तक पहुँच गया है, जो 2023–24 में 396.69 लाख टन था। उन्होंने कहा कि उत्पादकता 2023–24 के 1314 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024–25 में 1412 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है, जो किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और यह संदेश देती है कि सही नीति, बीज, तकनीक और प्रोत्साहन से देश तिलहन में आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।
केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि 2025–26 में 1076 वैल्यू चेन क्लस्टरों के माध्यम से 13.35 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को तिलहन के अंतर्गत लाया गया है, 60 बीज केंद्र स्थापित किए गए हैं, 50 बीज भंडारण इकाइयों को मंजूरी दी गई है और 400 तेल मिलें स्थापित हो चुकी हैं, जबकि कुल 800 तेल मिलें स्थापित करने का लक्ष्य है, ताकि उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग और बाजार तक पूरी श्रृंखला मजबूत हो।
तिलहन में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि तिलहन में आत्मनिर्भरता के लिए 10,103 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि किसानों को तकनीक, बीज, सिंचाई, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में पूरा सहयोग मिल सके। उन्होंने बताया कि लक्ष्य यह है कि तिलहन का क्षेत्र 29 मिलियन हेक्टेयर से बढ़ाकर 33 मिलियन हेक्टेयर किया जाए, उत्पादकता 1353 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 2112 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की जाए और कुल उत्पादन 39.2 मिलियन मैट्रिक टन से बढ़ाकर 69.7 मिलियन मैट्रिक टन तक ले जाया जाए, ताकि खाद्य तेलों में आयात पर निर्भरता में निर्णायक कमी लाई जा सके और किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों से अधिक आय मिले।
दलहन मिशन:100% खरीद
उन्होने बताया कि दलहन मिशन के तहत सभी राज्यों को बीज उत्पादन में अधिकतम वृद्धि करने के लिए कहा गया है, ताकि दालों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज किसान के पास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि अरहर, उड़द, मसूर आदि दालों में बीज उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रति क्विंटल सहायता दी जाएगी- तुर में 4500 रुपये प्रति क्विंटल, तुर–उड़द में 2000 रुपये प्रति क्विंटल और चना में 1800 रुपये प्रति क्विंटल की मदद दी जा रही है, ताकि किसान अच्छे बीज तैयार करने के लिए प्रेरित हों।
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने बताया कि किसानों को सब्सिडी पर बीज वितरण के लिए भी राज्यवार लक्ष्य तय किए गए हैं- मध्य प्रदेश के लिए 3,10,870 क्विंटल, राजस्थान के लिए 2,45,000 क्विंटल, महाराष्ट्र के लिए 87,500 क्विंटल और गुजरात के लिए 40,000 क्विंटल दलहन बीज वितरण का लक्ष्य निर्धारित है। उन्होंने कहा कि नई दलहन किस्मों को शीघ्रता से सीड चेन में लाने पर विशेष जोर दिया गया है; राजस्थान में 79, गुजरात में 58, मध्य प्रदेश में 63 और महाराष्ट्र में 58 नई दाल किस्मों की पहचान और उपयोग पर काम हो रहा है।

