हर दिन कुछ नया पाने की इच्छा हमें पाप की ओर धकेल रही है: योग सागर महाराज

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कोटा। चंद्र प्रभु दिगंबर जैन समाज समिति द्वारा जैन मंदिर ऋद्धि-सिद्धि नगर कुन्हाड़ी में अध्यामित्क ज्ञान सरिता में योग सागर महाराज ने धर्मसभा में अपने पुण्य और पाप के महत्व को उजागर करते हुए कहा कि जब जीवन में समस्याएं आती हैं, तो हम उन्हें व्यक्तिगत रूप से लेते हैं, लेकिन वे हमारे कर्मों का परिणाम होती हैं।

अच्छे कार्यों का श्रेय दूसरों को देते हैं, परंतु हमें खुद को भी श्रेय देना चाहिए। क्योंकि यह हमारे पुण्य का उदय होता है। वर्तमान समय में लोग पाप के साधनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जबकि पुण्य के साधन कम हो रहे हैं। हमें राम के मार्ग पर चलकर पुण्य का संग्रह करना चाहिए, न कि रावण जैसे कार्यों में लिप्त होना चाहिए। जीवन में सही दिशा चुनना और अपने कर्मों पर ध्यान देना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लोग पुण्य के बजाय पाप के साधनों की तलाश में ज्यादा लगे हुए हैं। पहले के समय में लोग सीमित साधनों में संतुष्ट रहते थे, लेकिन अब हर दिन कुछ नया पाने की इच्छा लोगों को पाप की ओर धकेल रही है। इसके बावजूद कुछ लोग अभी भी पुण्य के साधनों में लगे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे जीवन का उद्देश्य केवल अपना काम बनाना नहीं होना चाहिए, बल्कि यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हमारे कारण किसी और का नुकसान न हो। हम अक्सर अपने दिन को संवारने में लगे रहते हैं, जबकि दूसरों का दिन संवारने की ओर ध्यान नहीं देते। उदाहरण के तौर पर, रास्ते में ठंड में खड़ी गाय की मदद करना या सिग्नल पर गुब्बारे बेचते बच्चे की मदद करना, ये छोटे कार्य भी पुण्य का संग्रह करते हैं।

उन्होंने कहा कि राम ने अपने वनवास के दौरान कई लोगों का उद्धार किया, उन्होंने केवल खुद के लिए नहीं बल्कि दूसरों के भले के लिए भी काम किया। इसी प्रकार, हमें अपने जीवन में स्वार्थ छोड़कर दूसरों के लिए कुछ अच्छा करने का प्रयास करना चाहिए। अगर हम दूसरों को खुश करने की कोशिश करेंगे, तो उनके आशीर्वाद हमें जीवन में ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।

यदि आपकी इच्छाएं बड़ी हैं, तो आपको उतनी ही मेहनत भी करनी होगी। केवल आकांक्षाएं रखना पर्याप्त नहीं है; पुरुषार्थ के बिना आपको सफलता नहीं मिलेगी। छोटे-छोटे कर्मों से पुण्य और पाप दोनों का संग्रह होता है।

मंच संचालन पारस कासलीवाल एवं संजय सांवला ने किया। इस अवसर ऋद्धि-सिद्धि जैन मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा, सचिव पंकज खटोड़, कोषाध्यक्ष ताराचंद बडला,टीकम पाटनी, पारस कासलीवाल, पारस लुहाड़िया, पारस बज आदित्य, निर्मल अजमेरा,पीयूष बज, सहित श्रावक उपस्थित रहे।