जयपुर। राजस्थान समेत एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया लागू राज्यों में वोटर लिस्ट से नाम जोड़ने और हटाने को लेकर दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि चुनाव आयोग ने बढ़ा दी है। आयोग ने पहले 15 जनवरी तय अंतिम तारीख को बढ़ाकर अब 19 जनवरी कर दिया है।
इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए न सिर्फ भाजपा बल्कि चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं और मामले को अदालत तक ले जाने का ऐलान किया है।
दरअसल, एसआईआर के तहत मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया चल रही है। इस दौरान वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने और कटवाने के लिए दावे-आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं।
कांग्रेस का आरोप है कि अंतिम दिन यानी 15 जनवरी को प्रदेश के कई इलाकों में एक साथ हजारों आवेदन जमा किए गए, जो सामान्य प्रक्रिया से परे हैं। पार्टी का दावा है कि यह सब भाजपा के इशारे पर किया गया ताकि कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें और भाजपा समर्थकों के फर्जी नाम वोटर लिस्ट में जोड़े जा सकें।
कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पहले ही चुनाव आयोग से शिकायत की थी और प्रदेशभर में इसके खिलाफ मुहिम चलाने की घोषणा भी की थी। इसी बीच चुनाव आयोग द्वारा अचानक दावे-आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि चार दिन बढ़ाने के फैसले ने कांग्रेस के संदेह को और गहरा कर दिया है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भाजपा के साथ-साथ चुनाव आयोग पर भी पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। जूली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि भाजपा ने वोटर लिस्ट में कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम कटवाने और सूची में छेड़छाड़ का पूरा प्रयास किया, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सजगता से यह षड्यंत्र सफल नहीं हो पाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब इस षड्यंत्र में चुनाव आयोग भी शामिल हो गया है और बिना किसी ठोस आवश्यकता के राजस्थान में एसआईआर के तहत आपत्तियों की तारीख बढ़ा दी गई है, जिससे भाजपा को दोबारा वही कुप्रयास करने का मौका मिल सके।
जूली ने कहा कि दावे-आपत्तियों की तारीख बढ़ाने का फैसला संदेह पैदा करता है, क्योंकि पहले से तय समयसीमा के भीतर ही अधिकांश लोग अपनी आपत्तियां दर्ज करा चुके थे। ऐसे में अचानक अवधि बढ़ाने का मतलब साफ है कि किसी खास एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने तक कार्यकर्ता पूरी तरह सजग रहें और किसी भी तरह की बेईमानी या लोकतांत्रिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ न होने दें। जूली ने दावा किया कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से उन्हें कई गंभीर शिकायतें मिली हैं, जिनमें अधिकारियों पर दबाव डालकर नियमों के खिलाफ काम करने के आरोप शामिल हैं।
कांग्रेस ने अब इस पूरे मामले को न्यायालय में चुनौती देने का निर्णय लिया है। टीकाराम जूली ने शनिवार को घोषणा की कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने और जोड़ने के लिए एक साथ हजारों फॉर्म स्वीकार किए जाने के मामले में कांग्रेस कोर्ट में याचिका दायर करेगी। पार्टी का कहना है कि यह न सिर्फ चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है, बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद पर भी हमला है।
कांग्रेस का यह भी आरोप है कि यदि समय रहते इन गड़बड़ियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले चुनावों में मतदाता सूची की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। पार्टी ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है और कानूनी व राजनीतिक दोनों स्तरों पर लड़ाई जारी रहेगी।
वहीं, चुनाव आयोग की ओर से तारीख बढ़ाने के फैसले को लेकर अभी तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, आयोग का तर्क आमतौर पर यह रहता है कि अधिक से अधिक पात्र मतदाताओं को मौका देने के लिए समयसीमा बढ़ाई जाती है। लेकिन राजस्थान में इस फैसले ने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।
अब देखना होगा कि कांग्रेस की प्रस्तावित याचिका पर अदालत क्या रुख अपनाती है और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर चुनाव आयोग किस तरह सफाई देता है। फिलहाल, वोटर लिस्ट संशोधन का मुद्दा राजस्थान की राजनीति के केंद्र में आ गया है

