स्टूडेंट्स मन बेचैन है तो अपने टीचर, काउंसलर या पेरेंट्स को जरूर बताएं

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हॉप सोसायटी ने कोचिंग स्टूडेंट्स को दिए तनाव नियंत्रित करने के टिप्स

कोटा। हॉप सोसायटी के अध्यक्ष और वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. एम.एल. अग्रवाल ने कहा कि अगर मन बेचैन है तो टीचर, काउंसलर या पेरेंट्स को जरूर बताएं।

वे बुधवार को मोशन एजुकेशन के दक्ष कैंपस में अंतरराष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम दिवस पर आयोजित मेंटल हेल्थ अवेयरनेस प्रोग्राम के तहत संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर हॉप सोसायटी के सचिव डॉ. अविनाश बंसल और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गीता बंसल ने भी स्टूडेंट्स को तनाव नियंत्रित करने के टिप्स दिए। मोशन एजुकेशन के ज्वाइंट डायरेक्टर अमित वर्मा और सीनियर फैकल्टी भरत सोनकिया ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती रेनू सिंह ने किया।

वक्ताओं ने कहा कि हर आत्महत्या सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि अनगिनत जिंदगियों पर असर डालने वाली गहरी त्रासदी है। अगर कोई अपनी परेशानियों को शेयर करता है और कोई उसकी बात ध्यान से सुन ले तो आत्महत्या को रोका जा सकता है। इसलिए जब भी कोई अपनी चिंता के बारे में बात करे, तो बिना किसी पूर्वाग्रह के उसकी बात सुनें। नज़रअंदाज़ न करें और न ही नीचा दिखाएं।

डॉ. एम.एल. अग्रवाल ने कहा कि तनाव आज हर स्टूडेंट की सबसे बड़ी जंग है। एग्जाम, करियर, पैरेंट्स की उम्मीदें और सोशल मीडिया की तुलना—सब दिमाग पर भारी बोझ डालते हैं। सबसे पहले हमें स्वीकार करना होगा कि पढ़ाई ज़िंदगी का हिस्सा है, पूरी ज़िंदगी नहीं। तनाव से निकलना मुमकिन है, बस स्मार्ट और पॉज़िटिव स्टेप्स अपनाने की ज़रूरत है।

उन्होंने कहा कि जब रूटीन क्लियर हो तो दिमाग खुद शांत रहता है। इसलिए एक प्रॉपर टाइमटेबल बनाएं—पढ़ाई, ब्रेक और नींद सब बैलेंस में हो। पढ़ाई के बीच छोटे-छोटे ब्रेक ज़रूर लें। इसमें हल्का म्यूजिक सुन सकते हैं, वॉक कर सकते हैं या स्ट्रेचिंग। ये माइक्रो-रेस्ट दिमाग की बैटरी चार्ज कर देता है। याद रखें, सब कुछ कंट्रोल करना ज़रूरी नहीं है। खुद से कहें—“मैं अपनी पूरी कोशिश कर रहा हूं, यही काफी है।”

डॉ. अविनाश बंसल ने कहा कि अकेलापन तनाव को और बढ़ा देता है। इसलिए पॉज़िटिव फ्रेंड्स से बातें करें, फैमिली के साथ खुलकर हंसें। फिजिकल एक्टिविटी स्ट्रेस हार्मोन को घटाती है। रोज़ाना कम से कम 20–30 मिनट एक्सरसाइज़ करें—जैसे जॉगिंग, योग या डांस। वहीं क्वालिटी स्लीप ब्रेन का रीसेट बटन है, इसलिए 6–8 घंटे की नींद जरूर लें।

डॉ. गीता बंसल ने कहा कि शौक ज़रूरी है। यह दिमाग को स्ट्रेस से बाहर खींचता है। म्यूजिक, ड्रॉइंग, गार्डनिंग, लिखना—कुछ भी करें जिससे दिल खुश हो। बेचैनी हो तो गहरी सांस लें। यह दिमाग के रिफ्रेश बटन की तरह काम करता है। लेकिन अगर तनाव बहुत ज़्यादा हो तो तुरंत टीचर, काउंसलर या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से शेयर करें।