नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों में अदरक एवं सौंठ की आवक सामान्य स्तर से कम देखी जा रही है और इसलिए मांग ज्यादा मजबूत नहीं होने के बावजूद कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव का माहौल है।
गर्मी का मौसम आरंभ हो चुका है और आगामी समय में तापमान काफी ऊंचा रहने की संभावना है। इससे घरेलू प्रभाग में सौंठ की मांग एवं खपत में कमी आ सकती है। केरल में सौंठ के नए माल की आवक सामान्य स्तर से कम हो रही है मगर कर्नाटक में आपूर्ति की स्थिति अच्छी बताई जा रही है। कर्नाटक से दिल्ली में अदरक की आवक भी हो रही है मगर पूर्वोत्तर राज्यों से नगण्य मात्रा में आपूर्ति होने की सूचना मिल रही है।
सर्दी का मौसम समाप्त होने वाला है। आमतौर पर जाड़े के दिनों में अदरक एवं सौंठ की खपत बढ़ जाती है। केरल की बेंचमार्क कोच्चि मंडी में सीमित मात्रा में सौंठ की आवक होने के बावजूद मांग एवं उठाव सुस्त रहने से कीमतों पर दबाव पड़ने लगा है।
गुणवत्ता के आधार पर पिछले दिनों वहां सौंठ का भाव 240 से 270 रुपए प्रति किलो के बीच दर्ज किया गया। उत्तरी भारत के प्रमुख खपत केन्द्रों में भी कीमत नरम पड़ने की संभावना है। बाजार के रुख को भांपते हुए उत्पादकों एवं स्टॉकिस्टों ने अपने माल की बिक्री बढ़ानी शुरू कर दी है। दिल्ली में बंगलौर लाइन से आने वाली अदरक का भाव गिरकर 40-45 रुपए प्रति किलो पर आ गया है
जो पिछले साल एक समय बढ़कर 200-225 रुपए प्रति किलो के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया था। सौंठ का पुराना स्टॉक काफी कम बताया जा रहा है जबकि इसका निर्यात प्रदर्शन बेहतर रहने के संकेत मिल रहे हैं।
प्रमुख उत्पादक एवं व्यापारिक मंडियों में अदरक एवं सौंठ का जबरद्स्त दबाव नहीं है लेकिन मांग तथा उठाव भी सुस्ती ही है। इसके फलस्वरूप आगामी समय के दौरान इसकी कीमतों में भारी तेजी-मंदी आना मुश्किल लगता है।
समझा जाता है कि यदि निर्यात मांग मजबूत रही तो सौंठ का भाव कुछ मजबूत हो सकता है। रमजान की मांग कुछ दिनों तक बाजार को स्थिर बनाये रखने में मददगार साबित हो सकती है। केरल में सौंठ के नए माल की छिटपुट आवक आरंभ हो चुकी है।

