सोया तेल का आयात 60 प्रतिशत उछलकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान

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मुम्बई। स्वदेशी वनस्पति तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के शीर्ष विश्लेषकों ने 2023-24 के मुकाबले 2024-25 मार्केटिंग सीजन के दौरान सोयाबीन तेल का आयात 60 प्रतिशत उछलकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया है जबकि दूसरी ओर पाम तेल का आयात घटकर पिछले पांच वर्षों के नीचले स्तर पर सिमट जाने की संभावना व्यक्त की है।

पाम तेल तुलना में सस्ते दाम पर उपलब्ध होने से भारतीय रिफाइनर्स इस बार सोया तेल के आयात में जबरदस्त सक्रियता दिखा रहे हैं। दुनिया में वनस्पति तेल के सबसे प्रमुख आयातक देश-भारत द्वारा सोया तेल की भारी खरीद किए जाने से इसके वैश्विक बाजार मूल्य को जोरदार समर्थन मिल रहा है और चालू वर्ष के दौरान अब तक इसमें 31 प्रतिशत का इजाफा हो चुका है। दूसरी ओर मलेशिया में क्रूड पाम तेल (सीपीओ) के बेंचमार्क वायदा मूल्य पर दबाव पड़ने की सभावना है।

उद्योग-व्यापार समीक्षकों के अनुसार 2023-24 के मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के दौरान देश में कुल 34.40 लाख टन सोयाबीन तेल का आयात हुआ था जबकि 2024-25 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन में आयात उछलकर 55 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान है।

लेकिन इसी अवधि में पाम तेल का आयात 13.5 प्रतिशत घटकर 78 लाख टन पर अटक जाने की संभावना है जो वर्ष 2019-20 के बाद का सबसे निचला स्तर होगा। इसी तरह सूरजमुखी तेल का आयात भी 20 प्रतिशत घटकर 28 लाख टन पर सिमट सकता है जो पिछले तीन वर्षों में सबसे कम होगा।

सोयाबीन तेल के आयात में जबरदस्त उछाल आने के कारण 2024-25 के पूरे मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) में खाद्य तेलों का कुल आयात 1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 161 लाख टन पर पहुंचने की उम्मीद है। एक अग्रणी उद्योग संस्था- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के कार्यकारी निदेशक का कहना है

कि वर्तमान मार्केटिंग सीजन में कई महीनों तक पाम तेल का भाव काफी ऊंचे स्तर पर बरकरार रहा जिससे भारतीय रिफाइनर्स को सोयाबीन तेल का आयात बढ़ाने का प्रोत्साहन मिल गया।

सोयाबीन तेल न केवल सस्ते दाम पर उपलब्ध था बल्कि प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों में इसका पर्याप्त स्टॉक भी मौजूद था। चालू वर्ष के आरंभिक महीनों के दौरान सोयाबीन तेल के मुकाबले क्रूड पाम तेल का निर्यात ऑफर मूल्य 150 डॉलर प्रति टन तक ऊंचा हो गया था।

इसके परिणामस्वरूप भारत में जनवरी से अप्रैल 2025 के दौरान इसके आयात में जोरदार गिरावट आ गई। पहले पाम तेल के एक विकल्प के रूप में सोया तेल का आयात हो रहा था जबकि अब सरसों तेल की कीमतों में भारी उछाल आने के कारण भी इसके आयात में बढ़ोत्तरी हो रही है। गत दो माह से सरसों तेल का भाव ऊंचा चल रहा है।