सोया एवं सरसों डीओसी के निर्यात में 50 प्रतिशत की भारी गिरावट

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मुम्बई। गैर प्रतिस्पर्धी कीमत एवं कमजोर वैश्विक मांग के कारण जनवरी में भारतीय ऑयल मील के निर्यात में करीब 42 प्रतिशत की जोरदार गिरावट दर्ज की गई। दोनों प्रमुख ऑयल मील- सोया डीओसी एवं सरसों खल (रेपसीड मील) के शिपमेंट में लगभग 50 प्रतिशत की कमी आ गई। अन्य ऑयल मील का निर्यात लगभग सामान्य रहा।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) द्वारा संकलित आंकड़ों से ज्ञात होता है कि भारत से जनवरी 2025 में 4.52 लाख टन ऑयल मील का निर्यात हुआ था जो जनवरी 2026 में 42.5 प्रतिशत लुढ़ककर 2.60 लाख टन पर अटक गया। समीक्षाधीन अवधि के दौरान सोयामील का निर्यात 2.86 लाख टन से घटकर 1.32 लाख टन तथा सरसों खल का शिपमेंट 1.31 लाख टन से गिरकर 65 हजार टन रह गया।

लगातार कमजोर प्रदर्शन के कारण चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 10 महीनों में यानी अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के दौरान भारत से ऑयल मील का कुल निर्यात 32.35 लाख टन तक ही पहुंच सका जो 2024-25 वित्त वर्ष के इन्हीं महीनों के शिपमेंट 36.03 लाख टन से करीब 10 प्रतिशत कम रहा।

एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक का कहना है कि हाल के दिनों में सरसों की क्रशिंग की रफ्तार धीमी पड़ी है जिससे इसके तेल एवं मील या सीमित उत्पादन हो रहा है।

अब सरसों की नई फसल की आवक शुरू हो गई है और मार्च से इसकी जोरदार आपूर्ति तथा क्रशिंग होने लगेगी। तब सरसों खल का निर्यात योग्य स्टॉक भी बढ़ेगा और इसके शिपमेंट की गति सामान्य हो सकेगी। जनवरी में सोयाबीन का घरेलू बाजार भाव तेज रहा जिससे सोयामील का निर्यात ऑफर मूल्य ऊंचा हो गया।