मुम्बई। राष्ट्रीय- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बन रहे हालत को देखते हुए लगता है कि अगले महीने सोयाबीन एवं मूंगफली के घरेलू बाजार भाव में तेजी आ सकती है। वैसे वैश्विक बाजार में सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल की कीमतों में कोई विशेष उछाल नहीं आया है
और मलेशिया में पाम तेल का बकाया अधिशेष स्टॉक बढ़कर 28 लाख टन से ऊपर पहुंच जाने के कारण बेंचमार्क वायदा मूल्य पर दबाव रहने की संभावना है लेकिन अमरीकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपए की विनिमय दर लुढ़ककर अब तक के सबसे निचले स्तर पर आने से भारतीय रिफाइनर्स के लिए सोया तेल एवं सूरजमुखी तेल का आयात काफी महंगा साबित होने लगा है।
इसके फलस्वरूप रिफाइनर्स ने दिसम्बर तथा जनवरी में शिपमेंट के लिए सोया तेल के 70 हजार टन के आयात सौदे को कैंसिल कर दिया है और सूरजमुखी तेल का आयात अनुबंध करने से हिचकने लगे हैं। सूरजमुखी तेल का आयात घटने तथा खर्च बढ़ने से मूंगफली तेल पर निर्भरता बढ़ सकती है जिससे क्रशिंग इकाइयों में मूंगफली की मांग तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि अगर जनवरी 2026 तक सोयाबीन तथा मूंगफली के घरेलू बाजार मूल्य में औसतन 500-500 रुपए प्रति क्विंटल तक की तेजी आ जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी। सोयाबीन फसल की कटाई-तैयारी लगभग समाप्त हो चुकी है मगर इसका थोक मंडी भाव सरकारी समर्थन मूल्य से काफी नीचे चल रहा है।
मूंगफली फसल की कटाई-तैयारी अभी जारी है मगर अधिकांश मंडियों में इसका दाम भी काफी नीचे है। महाराष्ट्र में सोयाबीन तथा गुजरात में मूंगफली की भारी मात्रा में सरकारी खरीद हो रही है जिसकी स्वीकृति केन्द्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा पहले ही दी जा चुकी है।

