राष्ट्रपति के पास आर्थिक आपातकाल घोषित करने और नए कर लगाने की शक्ति नहीं
नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शुल्क (टैरिफ) पर अकेले चलने की कीमत चुकानी पड़ी। क्योंकि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ट्रंप के पास आर्थिक आपातकाल घोषित करने और आयात पर बड़े पैमाने पर नए कर लगाने की शक्ति नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है। बहुमत वाले फैसले में चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अधिकारियों की सीमाएं लांघ दी हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकनॉमिक पावर्स ऐक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल करके बिना कांग्रेस की मंजूरी के ही टैरिफ थोप दिया। अमेरिका ने भारत पर भी 50 फीसदी तक का टैरिफ लगा दिया था। हालांकि बाद में इसे घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया।
अमेरिका के संविधान में कांग्रेस के टैक्स और टैरिफ के अधिकार दिए गए हैं। हालांकि ये अधिकार राष्ट्रपति को नहीं मिले हैं। ऐसे में चीफ ज्टिस ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अधिकारों की सीमाओं का उल्लंघन किया है। उनके फैसलों में व्यापार नीति को मजबूत करने की जगह दुश्मनी निकालने और बदलने की भावना नजर आती है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद सवाल है कि क्या अब वसूला गया टैरिफ रिफंड किया जाएगा। अगर ऐसा होता है ति अमेरिका को 175 अरब डॉलर लौटाने होंगे। वहीं डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि टैरिफ को लेकर किए गए फैसले देश के हित में हैं। उनका कहना है कि टैरिफ नहीं होता तो दुनिया उनपर हंसती। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में वसूले गए टैरिफ को रिफंड करने जैसी कोई बात नहीं कही गई है।
लिबरल जेस्टिस केतनजी ब्राउन जैक्सन, एलेना कागन और सोनिया सोतोमेयर, जस्टिस ऐमी कोनी, बैरेट, नील गोरसुच और जॉन रॉबर्ट्स ने टैरिफ को रद्द करने का समर्थन किया। वहीं जस्टिस सैमुएल एलिटो, क्रेलेंस थॉमस और ब्रेट कावानाफ ने टैरिफ को बनाए रखने का समर्थन किया। कावानाफ ने कहा कि टैरिफ रिफंड करने का फैसला बहुत ही कॉम्प्लिकेटेड हो सकता है। ऐसे में सरकार को अरबों डॉलर लौटाने पड़ेंगे।
ट्रंप ने मध्यावधि चुनावों से पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए अपने आर्थिक प्रस्तावों का आधार टैरिफ को बनाया था, यहां तक कि उन्होंने टैरिफ को “शब्दकोश का अपना पसंदीदा शब्द” भी बताया था। उन्होंने वादा किया था कि कारखाने विदेशों से वापस आएंगे और अपने साथ नौकरियां लाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी थी कि टैरिफ हटाने से अमेरिका गहरी मंदी में डूब सकता है।
शुक्रवार को दिए गए न्यायालय के फैसले से मध्यावधि चुनाव वाले वर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर राजनीतिक और आर्थिक अराजकता के और भी लंबे समय तक बने रहने की आशंका है। जब न्यायालय का फैसला आया तक ट्रंप कई गवर्नर के साथ बैठक कर रहे थे जो जल्द ही समाप्त हो गई।रिपब्लिकन रणनीतिकार डग हेये ने कहा कि यह तुरंत स्पष्ट हो गया कि राष्ट्रपति इस फैसले से “खुश नहीं होंगे”।
हालांकि, हेये ने कहा कि ट्रंप अपने व्यापार एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कोई और रास्ता खोजने की कोशिश करेंगे।उन्होंने पूछा, “क्या वह इसे एक अवसर के रूप में इस्तेमाल करने का तरीका ढूंढ पाएंगे या नहीं? बहुत सारे सवाल हैं।” ट्रंप के टैरिफ के आक्रामक इस्तेमाल ने कई रिपब्लिकन सांसदों को सार्वजनिक और व्यक्तिगत रूप से असहज कर दिया था। उन्हें कर बढ़ाने के लिए बचाव करना पड़ा।
ट्रंप के पहले कार्यकाल में उपराष्ट्रपति रहे माइक पेंस ने उच्चतम न्यायालय के फैसले को जनता की जीत बताया। डेमोक्रेट नेताओं ने भी तत्काल प्रतिक्रिया दी। पार्टी सांसद सुजैन डेलबेन डीवाश ने कहा कि ट्रंप ”कोई राजा नहीं हैं” और उनकी शुल्क व्यवस्था हमेशा गैरकानूनी थी।

