सीमित बिक्री से चना बाजार में मजबूती की सम्भावना, जानिए क्या रहे भाव

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नई दिल्ली। जनवरी 2026 के मध्य तक देश के प्रमुख बाजारों में चना के भाव दिसंबर औसत से ऊपर कारोबार कर रहे हैं, जिससे बाजार को सहारा मिल रहा है। नवंबर से जनवरी के बीच चना कीमतों में हल्का लेकिन लगातार सुधार देखने को मिला है।

दिल्ली-राजस्थान, कटनी देसी, लातूर अन्नागिरी और मुंबई जैसे प्रमुख बाजारों में दिसंबर औसत की तुलना में भाव 200 से 300 रुपये प्रति क्विटल तक ऊंचे रहे। सितंबर 2025 की तुलना में दिसंबर के भाव अधिकतर किस्मों में स्थिर से मजबूत रहे, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि बाजार में दबाव नहीं है।

आयात
स्थिति बाजार के पक्ष में। अप्रैल से अक्टूबर 2025 के दौरान चना आयात लगभग 1.72 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि इसी अवधि में पिछले वर्ष आयात करीब 2 लाख टन था। यानी चालू सीजन में आयात पिछले साल से कम रहा।

पिछले वित्त वर्ष में कुल चना आयात लगभग 15 लाख टन रहा था, जिसमें से अकेले दिसंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच करीब 13 लाख टन आयात हुआ था। इसके मुकाबले इस सीजन में आयात की रफ्तार काफी धीमी।

फसल की स्थिति
चालू रबी सीजन में चना की बुवाई में सुधार देखा गया है। फिलहाल घरेलू फसल की स्थिति संतोषजनक बताई जा रही है, हालांकि फसल को आगे अच्छी पैदावार के लिए पर्याप्त बारिश की जरूरत होगी। मौसम का रुख आने वाले हफ्तों में उत्पादन की दिशा तय करेगा।

वैश्विक बाजार संकेत
ऑस्ट्रेलिया में इस बार चना की बड़ी फसल आई, लेकिन वहां किसान मौजूदा कम कीमतों पर बिक्री को लेकर इच्छुक नहीं हैं। वे भारतीय फसल और मांग की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तत्काल दबाव बनने की संभावना कम दिख रही है।

कम आयात, घरेलू बाजार में सीमित दबाव और वैश्विक स्तर पर सतर्क बिक्री जैसे कारणों को देखते हुए नई फसल के आने से पहले चना कीमतों में और मजबूती की संभावना बनी हुई है। यदि मौसम सामान्य रहा और आयात सीमित बना रहा, तो निकट अवधि में चना बाजार सकारात्मक बना रह सकता है।