सीबीएसई स्कूलों में अंग्रेजी की अनिवार्यता खत्म, विदेशी भाषाओं में शामिल

0
4

नई दिल्ली। CBSE 3 Language Formula: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ( CBSE ) का नया करिकुलम क्लास 6 के स्टूडेंट्स के लिए 3 भाषाओं का एक नया फॉर्मूला लाया है। क्लास 6 से अब तीन भाषाओं में से दो भारतीय भाषाएं पढ़ना जरूरी होगा।

नैशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के तहत अकैडमिक सेशन 2026-27 से सीबीएसई का यह फैसला स्कूल एजुकेशन में बड़ा बदलाव लेकर आएगा। हालांकि, दूसरी भारतीय भाषा कौन सी होगी, यह कैसे तय होगा? बोर्ड ने यह स्कूलों पर छोड़ा हुआ है।

सीबीएसई बोर्ड द्वारा जारी भाषाओं के नए सिस्टम के मुताबिक, क्लास 6 के बच्चे अब तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषाएं पढ़ेंगे। लैंग्वेज सब्जेक्ट को R1 (प्राथमिक भाषा), R2 (दूसरी भाषा) और R3 (तीसरी भाषा) में बांटा गया है। नियम के मुताबिक, तीन में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य होंगी।

सीबीएसई द्वारा जारी तीन लैंग्वेज फॉर्मूले में दो भारतीय भाषाओं का पढ़ना अनिवार्य है, जबकि अंग्रेजी भाषा को विदेशी भाषा के ऑप्शन में शामिल किया है। यानी अब स्टूडेंट्स दो भारतीय भाषाओं के अलावा तीसरी भाषा में रूप में अंग्रेजी चुन सकते हैं और नहीं भी।

तीसरी भाषा की किताबों इस साल क्लास 6 में शुरू की जाएंगी। दूसरा, अब तीसरी भाषा में इंग्लिश या किसी फॉरेन लैंग्वेज का ऑप्शन होगा। इंग्लिश के साथ किसी विदेशी भाषा को चुनने का ऑप्शन भी नहीं होगा।

2031 में क्लास 10 के स्टूडेंट्स के साथ पूरी तरह 3-लैंग्वेज सिस्टम लागू हो जाएगा। NEP 2020 में यह सिफारिश की गई है कि स्टूडेंट्स क्लास 10 तक तीन भाषाएं सीखें, जबकि अभी जो सिस्टम चल रहा है, उसमें वो दो भाषाएं पढ़ते हैं।

तीसरी भाषा संस्कृत या मिलेंगे ऑप्शन
अभी जो सिस्टम है, उसके तहत तीन लैंग्वेज में ज्यादातर स्टूडेंट्स इंग्लिश, हिंदी और तीसरी भाषा में संस्कृत, जर्मन, फ्रेंच, मैंडरिन या कोई और विदेशी भाषा में से एक लेते हैं। स्कूलों का मानना है कि बोर्ड की नई पहल अच्छी है, मगर दूसरी भारतीय भाषा कौन सी हो, यह सवाल बनेगा।